सुप्रीम कोर्ट ने सर्वाइकल कैंसर उपचार की दो वैक्सीन का लाइसेंस रद्द न करने पर जनहित याचिका में उठाए गए सवाल पर सोमवार को केंद्र से जवाब तलब किया है। याचिका में कहा गया है कि सरकार ने सुरक्षा मापदंडों की तत्काल खोज-खबर लिए बगैर ही दोनों वैक्सीन के उपयोग की इजाजत प्रदान कर दी। जबकि इसका प्रयोग करने वालों में इसके कई खतरनाक नुकसान देखे गए हैं।
जस्टिस केएस राधाकृष्णन व जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने याचिकाकर्ता की इस दलील से सहमति जताई कि दवा नियंत्रक ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए 2010 में गठित संसदीय स्थायी समिति के निर्देश पर सुरक्षा के लिए तत्काल शोध को नजरअंदाज कर लाइसेंस जारी कर दिए। याचिकाकर्ता कल्पना मेहता व अन्य स्वास्थ्य सुरक्षा कार्यकर्ता की ओर से वैक्सीन गार्डासील और सर्वारिक्स पर कथित आरोप लगाया गया कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इनमें पापिल्लोमा वायरस (एचपीवी) का इस्तेमाल किया जाता है दोनों वैक्सीन एमएसजी फार्मास्युटिकल प्राइवेट लिमिटेड और गैलेक्सो स्मिथ क्लाइन लिमिटेड की ओर से भारतीय बाजार में उतारी गई हैं।
याचिका के मुताबिक एचपीवी वैक्सीन संक्रमण के कुछ हिस्सों का बचाव करता है, जहां से सर्वाइकल कैंसर का विकास होता है। जबकि इससे अन्य हिस्सों को काफी नुकसान होता है। पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से लाइसेंस निलंबित करने और वैक्सीनों की वैज्ञानिक जांच कराने के बाद ही अनुमति प्रदान करने की मांग की। याचिका के मुताबिक दोनों कंपनियां देश के कानून से खिलवाड़ कर रही हैं। उनकी ओर से दवा को बाजार में उतारने से पहले के परीक्षण और अनुमति लेने में अनियमितता बरती गई है।