लोकसभा चुनाव से पहले मतदाताओं को लुभाने के साथ-साथ केंद्र अपनों को भी लाभ पहुंचाने में जुटी हुई है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री कमलनाथ ने दिल्ली के सबसे पॉश इलाके में स्थित सरकारी कॉलोनी के सामुदायिक केंद्र को अपने चहेतों के निजी क्लब को सौंप दिया है।
इसके पीछे मंत्रालय का दावा है कि निजी क्लब को सामुदायिक क्लब चलाने से जो लाभ मिलेगा, उसमें तीस प्रतिशत की हिस्सेदारी सरकार की होगी।
दक्षिणी दिल्ली के मोती बाग कॉलोनी के निवासी कल्याण परिषद का दावा है कि शहरी विकास मंत्री के आदेश से की जाने वाली यह कवायद पूरी तरह से मनमानी है और निवासियों के हितों के खिलाफ है।
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अभी कुछ साल पहले भी शहरी विकास मंत्रालय ने चाणक्यपुरी स्थित करोड़ों की जमीन को एक निजी होटल को कौड़ियों के भाव बेच दिया था। मंत्रालय की ओर से लिए जा रहे इस तरह के फैसले सरकारी हितों के पूरी तरह खिलाफ है। इस कॉलोनी में ज्यादातर सरकार के बड़े अधिकारी और उनके परिवार रहते हैं।
होटल की ओर से सामुदायिक केंद्र तक पहुंचने वाले मार्ग को भी बंद कर दिया गया है। इस सामुदायिक केंद्र में कॉलोनी के निवासी योग, टेबल टेनिस, सांस्कृतिक कार्यक्रम, निवासी कल्याण परिषद की बैठकें और मेल मिलाप के अलावा लेडीज क्लब भी चलते हैं।
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शहरी विकास मंत्रालय ने इन सारी गतिविधियों के अलावा दूसरी मनोरंजन कार्यक्रम को संचालित कराने का जिम्मा भी निजी पार्टी को सौंप दिया है। सरकार के बड़े पदों पर आसीन अधिकारियों ने अब मंत्रालय के इस आदेश के खिलाफ विरोध करने का निश्चय किया है।