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केंद्रीय विश्वविद्यालयों में और बढ़ेगी फीस

Fri, 09 Aug 2013 12:11 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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बढ़ती महंगाई, वेतन तथा अन्य खर्चों को पूरा करने के लिए मानव संसाधन मंत्रालय ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों तथा अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों को अपनी फीस बढ़ाने का सुझाव दिया है।
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मंत्रालय ने छात्रों से ज्यादा ट्यूशन फीस वसूले जाने के पीछे वेतन, बिजली, पानी तथा अन्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को आधार बताया है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार इस मुद्दे पर गठित विभिन्न कमेटियों ने अपनी रिपोर्टों में फीस को वर्तमान में हो रहे खर्च के अनुरूप बढ़ाये जाने का सुझाव दिया है।

राष्ट्रीय विकास परिषद से स्वीकृत 12 वीं पंचवर्षीय योजना में भी सरकार द्वारा वित्त पोषित शिक्षण संस्थाओं में फीस का ढांचा दुरुस्त करने का सुझाव दिया गया है। फीस वृद्धि का उद्देश्य है कि संस्थाएं आर्थिक रूप से ज्यादा से ज्यादा स्वावलंबी हों।
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यूजीसी ने बताया कि व्यय सुधार आयोग (ईआरसी) ने भी केंद्रीय शिक्षण संस्थाओं में छात्रों से ली जाने वाली फीस के संबंध में इसी तरह की सिफारिशें की हैं। ईआरसी ने छात्रों की फीस में बढ़ते खर्च के अनुपात में वृद्धि किए जाने की सिफारिश की है।

आयोग ने तो गरीब तथा मेधावी छात्रों को स्कॉलरशिप पर होने वाले खर्च का भी एक हिस्सा अन्य छात्रों से फीस के रूप में वसूले जाने का सुझाव दिया है।

केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री शशि थरूर ने सांसद नवीन जिंदल द्वारा पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि मंत्रालय ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को फीस के ढांचे में बदलाव के लिए जरूरी समीक्षा किये जाने का सुझाव दिया है।

उल्लेखनीय है कि सभी विश्वविद्यालय स्वायत्तशासी हैं। फीस बढ़ाने के लिए सीधे मंत्रालय उन्हें आदेश नहीं दे सकता है इसलिए वह केवल सुझाव देता है जिसे व्यावहारिक रूप में सरकार का आदेश मानकर अधिकांश विश्वविद्यालय अनुपालन भी करते हैं।
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मंत्रालय ने विश्वविद्यालयों को सलाह दी है कि फीस बढ़ाते समय गरीब तथा मेधावी बच्चों को इसके प्रभाव से बचाने के लिए भी जरूरी उपाय किए जाने चाहिए।

इसी क्रम में मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि ऐसे बच्चों को दी जाने वाली स्कालरशिप में बढ़ोत्तरी करके उन्हें फीस वृद्धि के भार से बचाया जा सकता है।
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