फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब हाई स्कूल तक मिलेगी मुफ्त शिक्षा?

Sat, 27 Oct 2012 08:46 AM IST
बृजेश सिंह/नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने अब दसवीं तक निःशुल्क शिक्षा के अधिकार कानून का दायरा बढ़ाने के लिए फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है। केंद्रीय शिक्षा सलाहकार परिषद की सब कमेटी ने दसवीं तक बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के साथ ही उन्हें सरकार की ओर से कॉपी-किताब, ड्रेस तथा लड़कियों को साइकिल भी दिए जाने की सिफारिश की है।
विज्ञापन


हाईस्कूल तक आरटीई कानून को लागू करने के लिए अगले पांच सालों में 20 हजार करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। सब कमेटी की रिपोर्ट पर पहली नवंबर को केब कमेटी की बैठक में राज्यों के साथ चर्चा के बाद सरकार अगला कदम उठाएगी।

आरटीई एक्ट 2009 के तहत वर्तमान में आठवीं कक्षा तक सरकार नि.शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान कर रही है। अब इसी कानून के तहत दसवीं तक बच्चों को सरकारी स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने की योजना है। हाई स्कूल तक आरटीई को लागू करने का फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए वर्ष 2011 में हरियाणा की शिक्षा मंत्री गीता भुक्खल के नेतृत्व में एक कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
विज्ञापन


कमेटी ने आरटीई को हाई स्कूल तक लागू करने की सिफारिश के साथ ही कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। कमेटी ने इसके तहत 17 साल से कम उम्र के बच्चों को लाभ दिए जाने का प्रस्ताव किया है। एससी, एसटी तथा गरीब बच्चों के साथ ही दूरस्थ शिक्षा के मामलों में उम्र के मामले में रियायत देने का भी सुझा दिया है।

योजना के तहत सभी स्कूलों में केवीएस के समान सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया है। इस योजना के तहत पढ़ने वाले बच्चों को मिड डे मील, निःशुल्क साइकिल, कॉपी-किताब एवं स्टेशनरी भी दिए जाने का प्रस्ताव है। कमेटी ने कमजोर वर्ग के बच्चों तथा लड़कियों को छात्रवृत्ति दिए जाने का भी सुझाव दिया है।
 
कमेटी ने हाई स्कूल तक आरटीई को लागू करने के अंतिम फैसले से पहले कुछ मुद्दों पर विभिन्न पक्षों से विस्तृत बातचीत का सुझाव भी दिया है। राज्यों से हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा खत्म करने, अभिभावकों से नो डिटेंशन पालिसी पर, निजी स्कूलों से गरीब बच्चों को निःशुल्क प्रवेश देने तथा स्कूल मैनेजमेंट कमेटी जैसे मुद्दों पर विभिन्न पक्षों से विस्तार से चर्चा होनी चाहिए।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें