बिहार में मिड डे मील योजना के तहत जहरीला भोजन परोसे जाने से मासूमों की मौत के बाद पूरी योजना के क्रियान्वयन पर ही सवाल उठ खड़ा हुआ है।
मानव संसाधन मंत्री पल्लम राजू ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि हमने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगने के साथ ही मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी वहां तथ्यों का जानकारी के लिए भेजा है।
उन्होंने बिहार समेत सभी राज्यों को ताकीद की है कि वे इस योजना के तहत तैयार किये जाने वाले भोजन की गुणवत्ता के लिए सभी जरूरी कदम उठाएं।
पल्लम राजू ने बताया कि मिड-डे मील के तहत घटना के दिन बच्चों को सोयाबीन की सब्जी और चावल परोसा गया था। खाने में जहरीला पदार्थ था।
राज्य सरकार की ओर से घटना की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद स्कूल की हेड मास्टर को निलंबित कर दिया गया है। मानव संसाधन मंत्रालय में संयुक्त सचिव अमरजीत सिंह को पटना भेजा गया है।
स्कूल शिक्षा सचिव ने बिहार के मुख्य सचिव अमरजीत सिन्हा से सीधे टेलीफोन पर बात कर घटना की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में पुष्टाहार की गुणवत्ता के लिए हम मंत्रालय की तरफ से हमेशा सभी जरूरी प्रयास करते रहे हैं।
पिछले साल रसोई गैस के दाम बढ़ने पर भी हमने योजना को प्रभावित होने से बचाने के लिए ईंधन मद में अतिरिक्त फंड मुहैया कराया था।
उन्होंने स्कूलों में खाना पकाने के बजाय डिब्बाबंद खाना दिए जाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर कहा कि एक्ट के तहत ताजा पका हुआ भोजन परोसने की ही व्यवस्था की गई है।
सर्वोच्च न्यायालय ने भी एक मामले में सुनवाई के बाद बच्चों को डिब्बाबंद भोजन दिए जाने को उचित नहीं ठहराया था।
राजू ने कहा कि पहले इस योजना के तहत केंद्रीय स्तर पर केवल भोजन के लिए बजट तय था किंतु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए बाद में केंद्र की ओर से स्कूलों में किचन व स्टोर के निर्माण के लिए भी धनराशि प्रदान की गई।
उन्होंने बताया कि अकेले बिहार में 65,977 स्कूलों में किचन एवं स्टोर बनाने की स्वीकृति प्रदान की गई है जिसमें से अभी तक केवल 44,159 किचन का निर्माण पूरा हो सका है।
स्कूलों में खाने की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ही अभिभावकों को भी इस योजना से जोड़ा गया है।