जाट आरक्षण निरस्त करने के फैसले पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।
सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि अन्य पिछड़े वर्ग की केंद्रीय सूची में जाटों को शामिल करने का अधिकार संविधान के अनुरूप है।
एनडीए ने जाटों को आरक्षण देने के यूपीए सरकार के फैसले का पुरजोर समर्थन किया था। केंद्र ने पुनर्विचार याचिका में शीर्ष अदालत से कहा है कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशें मानना केंद्र सरकार के लिए बाध्यकारी है, अदालत का ऐसा मानना एक त्रुटि है।
पुनर्विचार याचिका तैयार करने वाले अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह के मुताबिक याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग कानून के प्रावधानों से इतर केंद्र सरकार को अन्य पिछड़े वर्गों की केंद्रीय सूची में नाम शामिल करने या बाहर करने का अधिकार है।