मशहूर हस्तियों से जुड़ी हर बात बिकती है। भले वह उनसे जुड़ी कोई बीमारी या उसका इलाज ही क्यों न हो।
साइकल में बादशाहत पाने के बाद डोपिंग के अंधेरे कुएं में गिरे लांस आर्मस्ट्रॉन्ग हों, स्टाइलिश खब्बू बल्लेबाज युवराज सिंह हों या फिर लाखों नौजवानों के दिलों की धड़कन एंजेलिना जोली, इन सेलेब्रिटी की तरह इनकी बीमारियां भी काफी चर्चा में रही हैं।
एंजेलिना ने हाल में ब्रेस्ट कैंसर को लेकर एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार में लंबा लेख लिखा, जिसे लेकर चर्चा का बाजार गर्म हो गया।
उनके समर्थकों ने इसका स्वागत किया और कहा कि हॉलीवुड एक्ट्रेस काफी भलाई का काम कर रही हैं। लेकिन विरोधी खेमा इसे कुछ और नहीं, बल्कि सस्ता पब्लिसिटी स्टंट करार दे रहा है। दरअसल, सेलेब्स का बीमारियों को सामने रखकर माइलेज लेने से जुड़ी बहस पुरानी है।
ब्रांड आर्मस्टॉन्गः अर्श से फर्श पर
साइकलिंग के मास्टर और टूर डी फ्रांस के विजेता रहे आर्मस्ट्रॉन्ग ने कैंसर से उबरने के बाद लिवस्ट्रॉन्ग फाउंडेशन नामक संस्था बनाई, जो कैंसर पीड़ितों के लिए काम करती है।
इसे दुनियाभर से भारी आर्थिक मदद मिलती है और लिवस्ट्रॉन्ग के रिस्ट बैंड कई मुल्कों में बेचे जाते हैं। लेकिन कैंसर को शिकस्त देने वाला यह खिलाड़ी डोपिंग और दूसरे अपराधों की वजह से अब बदनामी के घेरे में है। इसका नुकसान ब्रांड आर्मस्ट्रॉन्ग को हुआ और उनसे जुड़ी हर संस्था को भी।
युवराज एपिसोड में बीमा कंपनी हिट विकेट
अब ट्यूमर को हराकर मैदान में वापसी करने वाले युवराज सिंह के किस्से पर गौर करें। जिस वक्त उनका अमेरिका में कैंसर का इलाज जारी था, तब एक बीमा कंपनी ने उनकी बीमारी को केंद्र में रख एडवरटाइजिंग कैम्पेन तैयार किया, जिसमें उनके समर्थकों के इमोशंस को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया।
इस कंपनी को चौतरफा आलोचना का सामना करना पड़ा था। ताजा मामला एंजेलिना जोली का है।
खबरों में बने रहने का चस्का
जानकारों का मानना है कि सेलेब्स का अपनी बीमारी को भुनाने का फॉर्मूला नया नहीं है। इम्पैक्ट इमेज कंसल्टेंट्स की संगीता एस बहल के मुताबिक जो लोग खबरों में होते हैं, उन्हें हमेशा खबरों में बने रहने का चाव हो जाता है। उन्होंने कहा, 'सेलेब्स की दुनिया में इमेज ही सबकुछ है। इसी काम के लिए पीआर एजेंसियां रखी जाती हैं।'
संगीता के मुताबिक, 'आम तौर पर किसी को बीमारी होने पर वह उसे अपने और अपने करीबियों तक सीमित रखता है। लेकिन सेलेब्स के मामले में ऐसा नहीं है। वे इस तरह का कुछ होने पर उसे और अधिक जाहिर करना चाहते हैं। ऐसा करने से उन्हें भावनाओं को भुनाने का मौका मिलता है।'
फायदा कम, नुकसान ज्यादा
इमेज कंसल्टेंट मानते हैं कि युवराज के मामले में यह फॉर्मूला काम कर गया, हालांकि बीमा कंपनी की काफी आलोचना हुई। इसके बाद उनकी बीमारी पर लिखी किताब भी हाथोंहाथ बिकी।
संगीता का कहना है, 'सेलेब्स को सही कारणों से चर्चा में रहना चाहिए। जो सेलेब्स आम जनता के लिए किसी खास उद्देश्य के साथ काम करते हैं, उनकी रणनीति सही है। लेकिन जो केवल अपने निजी फायदे के लिए बीमारियां भुनाते हैं, उन्हें संभलना चाहिए।'
भावनाओं से खिलवाड़ का नतीजा
हालांकि, सेलेब्स की इस रणनीति का दूसरा पहलू भी है। हरीश बिजूर कंसल्ट्स के प्रमुख और ब्रांड एक्सपर्ट हरीश बिजूर के मुताबिक सेलेब्स कभी-कभी जनता से जुड़ने के लिए खुद को आम इंसान के रूप में पेश करते हैं।
उन्होंने कहा, 'वे यह दिखाना चाहते हैं कि उन्हें भी आम लोगों की तरह गंभीर बीमारियां हो सकती हैं और होती हैं।' बिजूर के मुताबिक यह पूरी तरह गलत भी नहीं है, लेकिन जब लक्ष्य भावनाओं का फायदा उठाकर निजी हित साधना हो, तो सही नहीं है।
बिजूर ने कहा, 'यही कारण है कि जब कभी ब्रांड या कंपनियों ने सेलेब्स की बीमारियां भुनाने की कोशिश की है, उन्हें मुंह की खानी पड़ी है।'
इस पूरी कहानी से सबक यही मिलता है कि सेलेब्स को बीमारी जैसी अत्यंत निजी बातों का जिक्र करते वक्त कुछ सावधानी बरतनी चाहिए।