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करोड़ो लोगों की जिदंगी से खेल रहे दवाइयों के सौदागर

Mon, 19 Aug 2013 04:52 PM IST
इंटरनेट डेस्क
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दवाइयों का कारोबार करने वाली कंपनियां लगातार अपनी मनमानी कर रही हैं। सरकार की पाबंदी के बावजूद बिना ट्रायल किए कंपनियों ने 26 दवाइयों को मरीजों के इस्तेमाल के लिए बाजार में उतारा है।
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देश में बने कानून की खुले आम धज्जियां उड़ाई जा रही है। स्थायी संसदीय समिति की सख्त चेतावनी के बाद भी बिना किसी क्लीनिकल ट्रायल के नई दवाइयों को मरीजों के प्रयोग के लिए बाजार में उतार दिया है।

वर्ष 2010 से अब तक 26 नई दवाइयों को मंजूरी मिल गई है। जबकि इन्हें ट्रायल से नहीं गुजारा गया। सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने पिछले साल आठ नई दवाई को मंजूरी दी थी। इनमें से दो को बिक्री के लिए मंजूरी दे दी गई।
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वर्ष 2010 में 13 नई दवाइयों को सीडीएससीओ ने मंजूरी दे दी थी। जबकि तीन नई दवाओं को वर्ष 2011 में मंजूरी मिली थी। संसदीय पैनल पहले ही वर्ष 2008-2010 के बीच 38 नई दवाइयों को मंजूरी मिलने पर उंगली उठा चुका था, लेकिन इसके बावजूद ऐसा हुआ।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक बिना किसी क्लीनिक्ल ट्रायल और कोताही बरतने के साथ नई दवाइयों को बाजार में उतार दिया गया। सूत्रों ने बताया कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए सेफ्टी नॉर्म्स जारी कर दिए गए हैं।

सीडीएससीओ ने भी सभी राज्यों को पत्र लिखकर पूछा है कि 18 महीने के भीतर राज्यों द्वारा मंजूरी दी गई दवाओं के सेफ्टी के बारे में नॉर्म्स जारी किए जाएं। कई राज्यों ने बिना सीडीएससीओ की मदद के ही दवाओं को मंजूरी दे दी है।
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