सीबीआई के पूर्व निदेशक यूएस मिश्रा के जांच एजेंसी के सरकार के दबाव में काम करने के दावे से शुक्रवार को सियासत गरमा गई। उनके इस दावे के बाद भाजपा ने सरकार पर जोरदार हमला बोल दिया है। वहीं, सरकार ने मिश्रा के आरोपों को खारिज करते हुए सफाई दी है कि सीबीआई पूरी तरह स्वतंत्र संस्था है और उसके काम में सरकार कोई दखल नहीं देती।
मायावती के खिलाफ जांच पर था राजनीतिक दबाव
मिश्रा ने बृहस्पतिवार को एक चैनल से बातचीत में कहा था कि जब सीबीआई अहम राजनेताओं के खिलाफ किसी मामले की जांच करती है तो उस पर दबाव होता है कि या तो वह स्टेटस रिपोर्ट को लटका दे या फिर उसे किसी और तरह से पेश करे। उन्होंने दावा किया कि अपने कार्यकाल में वह जब बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच कर रहे थे तब उन पर भारी राजनीतिक दबाव था।
भाजपा का सरकार पर हमला
मिश्रा के इस दावे ने भाजपा को सरकार पर हमले का नया मौका दे दिया। भाजपा के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को कहा कि हम शुरू से कहते आ रहे हैं कि सरकार सीबीआई का दुरुपयोग अपने राजनीतिक फायदों के लिए कर रही है। अब मिश्रा के खुलासे ने हमारे आरोपों की फिर पुष्टि कर दी है। सीबीआई कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन बन चुकी है। जब उनसे पूछा गया कि राजीव शुक्ला तो कह रहे हैं कि मिश्रा राजग सरकार के समय सीबीआई निदेशक थे तो उनका कहना था कि मिश्रा ने जो बात कही है यह बात सीबीआई के दूसरे पूर्व निदेशक जोगिंदर सिंह भी कह चुके हैं।
दबाव की बात को नकारा
वहीं, पीएमओ में राज्यमंत्री वी नारायणसामी ने कहा कि सीबीआई अपने हिसाब से काम करती है। सरकार उसके काम में कोई दखल नहीं देती है। कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने भी सीबीआई पर सरकार के किसी दबाव की बात को सिरे से खारिज कर दिया।
वहीं, संसदीय मामलों के राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने तो उलटे भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि मिश्रा राजग के शासन के समय सीबीआई निदेशक थे। इसलिए उनके आरोपों पर भाजपा को जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मिश्रा बेमतलब विवाद खड़ा कर रहे हैं, जो अच्छी बात नहीं है।
सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगिंदर सिंह का कहना है कि मिश्रा सही बोल रहे हैं। चारा घोटाले की जांच के समय मुझ पर भी दबाव डाला गया था।