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'मेरी गिरफ्तारी की सीबीआई की कोशिश दुर्भावनापूर्ण'

Tue, 15 Jan 2013 08:48 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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गुजरात के पूर्व मंत्री अमित शाह ने तुलसीराम प्रजापति मुठभेड़ मामले में उन्हें हिरासत में लेने की सीबीआई को कोशिश को दुर्भावनापूर्ण करार दिया है। शाह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि प्रजापित और सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ को एक ही साजिश का हिस्सा बताने वाली सीबीआई अब उसी अपराध में उन्हें दोबारा गिरफ्तार करना चाहती है। एक ही मामले में दो बार गिरफ्तारी असंवैधानिक है।
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जस्टिस पी. सदाशिवम और जस्टिस बीएस चौहान की पीठ के समक्ष शाह के वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि सीबीआई ने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ और प्रजापति की हत्या को एक ही साजिश का हिस्सा बताया था। सोहाराबुद्दीन मामले में सीबीआई शाह को गिरफ्तार कर चुकी है। इस समय वह जमानत पर हैं। नवंबर में सीबीआई ने प्रजापति मामले में अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।

आरोप पत्र दाखिल करने के बाद सीबीआई शाह को फिर गिरफ्तार करना चाहती है। जेठमलानी ने सीबीआई पर आरोप लगाया कि शाह को फिर से गिरफ्तार करने की कानून इजाजत नहीं देता। दोनों मामलों की चार्जशीट अलग दायर की गई है। यदि दोनों वारदातें एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं तो मुकदमे भी साथ चलने चाहिए।
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अमित शाह को सीबीआई ने सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ कांड के सिलसिले में 25 जुलाई, 2010 को गिरफ्तार किया था। अहमदाबाद की साबरमती जेल में करीब तीन महीने काटने के बाद शाह को गुजरात हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया था।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर मुहर लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन प्रकरण मुंबई की अदालत में स्थानांतरित कर दिया था और सीबीआई को तुलसीराम प्रजापति मामले का केस मुंबई स्थानांतरित कराने की छूट दी थी।

जेठमलानी ने कहा कि सीबीआई ने सोहराबुद्दीन मामले में दाखिल आरोप पत्र और जांच की प्रगति रिपोर्ट में यही दावा किया था कि चूंकि प्रजापति नवंबर 2005 में सोहराबुद्दीन और उसकी पत्नी कौसर बी की हत्या की वारदात का चश्मदीद गवाह था, इसीलिये उसे भी मार दिया गया।

अमित शाह ने प्रजापति मुठभेड़ कांड में दूसरा आरोप पत्र दायर करने की सीबीआई की कार्यवाही को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि प्रजापति मामले में दायर दूसरे आरोप पत्र को सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ कांड में दूसरा पूरक आरोप पत्र माना जाना चाहिए।
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