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साहस दिखाना चाहिए था सीबीआई को: सुप्रीम कोर्ट

Wed, 08 May 2013 09:52 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि सीबीआई निदेशक और जांच दल को स्थिति रिपोर्ट का प्रारूप दो संयुक्त सचिवों को दिखाने से इंकार करने का साहस दिखाना चाहिए था।
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अदालत ने कहा कि वह जानना चाहती है कि क्या कानून मंत्री किसी मामले में दूसरे मंत्रालयों और प्रधानमंत्री कार्यालय के लोगों की संलिप्तता की जांच का विवरण या स्थिति रिपोर्ट सीबीआई से मांग सकते हैं।

अदालत ने जानना चाहा कि कानून मंत्री और दूसरे सरकारी अधिकारियों के सुझाव पर स्थिति रिपोर्ट में बदलाव करना क्या जांच की निष्पक्षता को प्रभावित नहीं करता।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई का काम ऐसा है कि उसे सरकारी अधिकारियों से मेलजोल नहीं करना चाहिए और सिर्फ छानबीन के लिए मुलाकातें होनी चाहिए जो सच्चाई को सामने लाने के लिए हों।

सीबीआई निदेशक खुद भी जांच दल में हैं, उन्हें रिपोर्ट साझा नहीं किए जाने पर निर्णय लेना चाहिए था और पीएमओ व कोयला मंत्रालय के अधिकारियों को रिपोर्ट नहीं दिखानी चाहिए थी।

गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत ने कहा कि वह कोयला घोटाला प्रकरण की जांच के बाद विशेष जांच दल गठित करने सहित तमाम पहलुओं पर विचार करेगा।

वहीं सीबीआई ने कोयला घोटाले में सुप्रीम कोर्ट को गहन और उच्चस्तरीय जांच का आश्वासन दिया और कहा कि अदालत के निर्देशों का अक्षरश: पालन किया जाएगा।

निर्देशों का करेंगे पालन: सीबीआई
सीबीआई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अक्षरश: पालन करेगी। इतना ही नहीं जांच एजेंसी अपने कामकाज में सर्वोच्च अदालत के निर्देशों के पीछे छिपे संदेशों को भी उतनी ही गंभीरता से लेगी।

सीबीआई ने कोल ब्लॉक आवंटन जांच की स्टेटस रिपोर्ट में हेरफेर के मामले की सुनवाई कर रही  सुप्रीम कोर्ट को यह भी भरोसा दिलाया है कि वह इस मामले की जांच पूरी सफाई और प्रोफेशनल तरीके से करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रधानमंत्री कार्यालय और कानून मंत्री द्वारा कोल ब्लॉक आवंटन पर सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट में बदलाव करने के मामले में सीबीआई और सरकार दोनों की जबरदस्त खिंचाई की।

सर्वोच्च अदालत ने कोल ब्लॉक मामले के जांच अधिकारी रविकांत को फिर से बहाल करने का भी आदेश जारी किया।

हालांकि सीबीआई का कहना है कि रविकांत को एजेंसी से हटाया नहीं गया था बल्कि वह निजी कारणों से खुद ही चले गए थे। सीबीआई छोड़ने के बाद रविकांत खुफिया एजेंसी आईबी में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर हैं।

एजेंसी के मुताबिक ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी रविकांत सीबीआई में चार साल का अपना कार्यकाल पूरा कर छह महीने एक्सटेंशन पर भी रहे। उस दौरान डीआईजी के पद पर उनकी पदोन्नति भी हुई।
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गौरतलब है कि वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट को दी गई शिकायत में कहा है कि कोलगेट जांच में अड़चन पैदा करने के लिए रविकांत को साजिश के तहत बीते 24 मार्च को आईओ के पद से हटाया दिया गया था।
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