कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने उनके खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश दिया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय पर इंदौर के एमजी रोड पर आवासीय भूमि पर व्यावसायिक शापिंग माल के निर्माण की अनुमति देने का आरोप है।
हाईकोर्ट के न्यायाधीश मूलचंद गर्ग और न्यायाधीश पीके जायसवाल की पीठ ने भाजपा के पूर्व पार्षद महेश गर्ग की जनहित याचिका पर सुनवाई करने के बाद इस मामले की छह माह में सीबीआई जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए। अदालत ने सीबीआई को इस मामले के पांच बिंदुओं का पता लगाने को भी कहा है।
इसमें दिग्विजय सिंह के कोड वर्ड एक्स 299 का मतलब पता लगाने के साथ ही यह कोड वर्ड सकारात्मक या नकारात्मक काम के लिए था, यह भी जांचने को कहा गया है। जनहित में आवासीय भूमि को व्यावसायिक उपयोग के लिए क्यों बदला गया, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा शापिंग माल के निर्माण के लिए किस आधार पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) दी गई और मध्य प्रदेश गृह निर्माण मंडल द्वारा इस मॉल की भागीदारी के 51 प्रतिशत शेयर क्यों वापस लिए गए, इन बिंदुओं की जांच करने को कहा है।
याचिका में दिग्विजय सिंह के अलावा तत्काल मुख्य सचिव एएन सिंह, आवास एवं पर्यावरण मंत्री राकेश सिंह चतुर्वेदी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पीवी कुलश्रेष्ठ, इंदौर नगर निगम के आयुक्त, बिल्डर मनीष कालानी, प्रेम कालानी, पद्मा कालानी सहित 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है।