आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसे सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए बड़ी राहत की खबर है। पर्याप्त सुबूत न मिलने के चलते सीबीआई उनके खिलाफ जांच की फाइल को बंद करने की तैयारी में है।
सूत्रों का कहना है कि शुरुआती रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि मुलायम और अखिलेश की संपत्ति में इजाफा रिश्तेदारों से लिए गए लोन के चलते हुई है, जिसे बाद में गिफ्ट के रूप में दिखाया गया है।
इसके अलावा एजेंसी ने पिता-पुत्र की संपत्तियों में कोई ऐसा इजाफा नहीं पाया, जिसका स्पष्टीकरण नहीं हो सके।
यह भी पता चला कि 1993 से 2005 के दौरान के दौरान मुलायम और अखिलेश के निवेश में कई गुना इजाफा हुआ, जिससे कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति का निर्धारण करना मुश्किल हो गया।
सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक इस मामले में जांच पूरी कर ली गई है और रिपोर्ट सीनियर अधिकारियों को सौंप दी गई है। अब इस मामले को बंद करना है या नहीं, इस पर वही फैसला लेंगे।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च, 2007 में अधिवक्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी की जनहित याचिका पर मुलायम और अखिलेश के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।
इस बीच, याचिकाकर्ता चतुर्वेदी ने आरोप लगाया है कि यूपीए सरकार खाद्य सुरक्षा बिल पर समर्थन हासिल करने के लिए जानबूझकर सपा प्रमुख को बचा रही है। उन्होंने बिना नाम लिए एक मंत्री पर धमकी देने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने कहा, ‘जब मैंने केस की फाइल बंद करने का विरोध किया तो, एक मंत्री ने मुझे फोन किया और धमकी दी कि जो काम मैंने 2008 में किया था, वह दोबारा न करे।’
चतुर्वेदी ने कहा, 'कांग्रेस की मुलायम के साथ डील हो गई है और एजेंसी सरकार के कहने पर काम कर रही है।’