समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर संशय अभी भी बना हुआ है।
मुलायम के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिलने का दावा कर रही सीबीआई इस मामले में जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाह रही है।
माना जा रहा है कि इस मामले की राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए एजेंसी का शीर्ष नेतृत्व उचित समय के इंतजार में है।
यही वजह है कि क्लोजर रिपोर्ट दायर करने के फैसले से जुड़ी तमाम तैयारियों के बावजूद सीबीआई ने अपने न्यायिक अधिकारियों को कोई नोट नहीं भेजा है।
तकनीकी तौर पर नोट जारी करने के बाद ही आधिकारिक वकील (एडवोकेट ऑन रिकार्ड) अदालत में क्लोजर रिपोर्ट फाइल करेंगे। इस प्रक्रिया में खासा वक्त लगता है।
सूत्रों के मुताबिक बृहस्पतिवार शाम तक इस सिलसिले में कोई नोट नहीं जारी किया गया है।
एजेंसी के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों मीडिया में मुलायम के खिलाफ मुकदमे की क्लोजर रिपोर्ट दर्ज करने के सीबीआई के फैसले की खबर के बाद विपक्ष ने एजेंसी की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
रिटायर्ड वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रकाश सिंह ने भी मुलायम समेत कई मामलों में सीबीआई जांच के पक्षपात और सुस्त चाल के आरोप भरी चिट्ठी लिख कर एजेंसी को पशोपेश में डाल दिया है।
इन्होंने आरोप लगाया है कि सीबीआई सरकार के इशारे पर चुनिंदा मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दायर कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक सरकारी इशारे पर काम करने की छवि से बाहर निकलने की कोशिश में लगे सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा फूंक फूंक कर कदम उठाने के पक्ष में हैं।
करीब दो महीने पहले मुलायम और उनके परिवार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले के जांच अधिकारी (आईओ) ने अपनी राय दी थी कि उन्हें इस मामले में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है।
रंजीत सिन्हा ने आईओ के इस रिपोर्ट पर विचार करने के बाद क्लोजर रिपोर्ट दायर करने का फैसला ले लिया।
लेकिन सूत्रों के मुताबिक अब इस मामले में राजनीतिक वादविवाद को देखते हुए क्लोजर रिपोर्ट कब दायर की जाए इस पर सीबीआई दुविधा में है।