आदित्य विक्रम बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमारमंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख के खिलाफ एफआईआर की जानकारी सरकार को बाद में मिली थी। जब सीबीआई ने यह एफआईआर कराई तब सरकार को इसकी जानकारी नहीं थी।
केंद्र सरकार में एक उच्च पदस्थ सूत्र ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, 'सीबीआई को यूपीए सरकार नियंत्रित कर रही है, यह बात इस तथ्य से ही गलत साबित हो जाती है कि कुमार मंगलम बिड़ला और पारख के विरुद्ध एफआईआर की जानकारी सरकार को नहीं थी।'
उड़ीसा के तालाबीरा-2 और तालाबीरा-3 कोयला खदानों के हिंडाल्को के आवंटन में अनियमितता के बारे में यह एफआईआर सीबीआई ने बिड़ला और पारख के विरुद्ध कराई थी।
प्रधानमंत्री कार्यालय भले ही अब कोयला आवंटन को सही ठहरा रहा हो, सीबीआई अब भी बिड़ला और पारख के खिलाफ एफआईआर निरस्त करने के पूर्व व्यापक जांच करना चाहती है।
सरकार में शामिल सूत्र मानते हैं कि कुमारमंगलम बिड़ला के साथ जो कुछ हुआ वह एक ऐसे समय हुआ जब नरेंद्र मोदी की तरफ कारपोरेट दुनिया का झुकाव बढ़ रहा है और भारत में निवेश की हालत ठीक नहीं है।
उपरोक्त सूत्र ने माना कि बिना ट्रैक रिकार्ड देखे बिड़ला के विरुद्ध एफआईआर करा देना एक खतरनाक कदम है, क्योंकि कोई भी उद्योगपति भविष्य में खदानों को आवंटित कराने से बचना चाहेगा और यह देश के आर्थिक विकास पर विपरीत असर डालेगा।
सरकार में यह राय भी है कि पारख के विरुद्ध एफआईआर से भी सरकार की निर्णय प्रक्रिया की गति प्रभावित हो सकती है।
इस बारे में केंद्रीय मंत्री कमलनाथ का कहना है कि कोयला आवंटन के पूरे मामले में जो भी सवाल उठे हैं, वे प्रक्रिया को लेकर उठे हैं। वे आरोप कोई भ्रष्टाचार के नहीं हैं, बल्कि यह सवाल उठा है कि पूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।