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बदायूं: सीबीआई नाकाम, गंगा में 'डूबे' बहनों के दफन शव

Sun, 20 Jul 2014 10:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बदायूं
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बदायूं के कटरा सआदतगंज में गंगा का रुख देखकर सीबीआई ने अपनी रणनीति में बदलाव जरूर किया, मगर शव निकालने में जांच एजेंसी को पहले दिन कामयाबी नहीं मिली। कटरा सआदतगंज में दो बहनों की रेप और हत्या के मामले की जांच कर रही सीबीआई को दोनों शवों का दोबारा पोस्टमार्टम 20 जुलाई को करवाना था।
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शुक्रवार को गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हुई तो जांच एजेंसी ने अपनी रणनीति बदल कर एक दिन पहले शनिवार को शव बाहर निकालने के लिए मशक्कत की लेकिन जांच एजेंसी शव निकालने में नाकाम रही। एसपी सिटी मानसिंह चौहान ने बताया कि अब शवों को निकालने के लिए रविवार को फिर से ऑपरेशन शुरू किया जाएगा।

दोनों लड़कियों के शवों को अटैना गंगा घाट पर दफन किया गया था। सीबीआई ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट की निगरानी में 20 जुलाई को दोनों शवों को बाहर निकाल कर एम्स के डॉक्टरों के पैनल से दोबारा पोस्टमार्टम कराना था।
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बढ़ा गंगा का जलस्तर

जांच एजेंसी को जब गंगा के लगातार बढ़ रहे जल स्तर के बारे में पता चला तो आनन-फानन में शव निकालने और इनका पोस्टमार्टम कराने की प्रक्रिया 19 जुलाई को ही शुरू करनी पड़ी। शनिवार सुबह से ही सीबीआई और फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीमों के अलावा डीएम शंभूनाथ और एसएसपी एलआर कुमार समेत पूरा पुलिस और प्रशासनिक अमला अटैना गंगा घाट पर जुट गया था।

इधर, दिन बढ़ने के बाद गंगा का जलस्तर भी बढ़ता गया। इस दौरान वह स्थान, जहां पर शवों का दफन किया गया था उससे गंगा का फैलाव करीब बीस मीटर तक हो गया था। दोपहर करीब दो बजे से सीबीआई ने शवों को निकालने के लिए काम शुरू किया और शाम सात बजे तक जांच एजेंसी फॉरेंसिक एक्सपर्ट और सैकड़ों श्रमिकों के साथ काम में जुटी रही लेकिन कामयाबी नहीं मिली।

इस बीच बाढ़ खंड की मानें तो इस समय दोनों शव गंगा में करीब दस फीट नीचे हैं। जिस जगह पर शवों का दफन किया गया है, वहां पर पांच से सात फीट तक पानी है।

अब ब्रिज कार्पोरेशन से मदद लेगी सीबीआई

गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद अटैना घाट पर दफन लड़कियों के शव निकालने के लिए सीबीआई अब ब्रिज कार्पोरेशन की मदद ले सकती है। गंगा जिस तरह से उग्र रुख अपनाती जा रही हैं, उसको देखकर ऐसा नहीं लगता कि जांच एजेंसी दोनों शव निकला कर उनका पोस्टमार्टम कराने में कामयाब होगी, यह भविष्य के गर्भ में है। इसका कारण यह है कि नरौरा बैराज से छोड़ा गया करीब 90 हजार क्यूसेक पानी रविवार सुबह अटैना घाट पर पहुंच जाएगा।

शनिवार को सीबीआई और फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने करीब पांच घंटे तक शव निकालने के लिए मशक्कत की। करीब दो सौ मजदूरों के जरिए पूरा दिन गंगा का रुख मोड़ने और पंपिंग सेट के जरिए शव वाले स्थान का पानी निकालने की कोशिश की गई। देर शाम तब जब जांच एजेंसी को इसमें कामयाबी नहीं मिली तो काम बंद कर आगे की रणनीति पर विचार शुरू  किया गया।

देर शाम सीबीआई सूत्रों ने बताया कि अब रविवार को शवों की खुदाई शुरू की जाएगी। इसके बाद भी अगर कामयाबी नहीं मिलती है तो जांच एजेंसी ब्रिज कार्पोरेशन की मदद ले सकती है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई ने इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी है।

कारगर नहीं हुआ बाढ़ खंड का भरोसा

सीबीआई और जिला प्रशासन ने बाढ़ खंड पर भरोसा किया था कि वह लड़कियों की कब्रों को बाढ़ से सुरक्षित रख सकते हैं। इसके लिए बाढ़ खंड के एक्सईएन डीके जैन और सहायक अभियंता अखिलेश कुमार ने अपने इंजीनियरों की टीम के साथ खुद मॉनीटरिंग की और सीबीआई को दोनों लड़कियों की कब्रों को सुरक्षित करने का भरोसा दिलाया था लेकिन एक दिन बाद ही बाढ़ के पानी से सुरक्षा घेरा टूट गया।

सुरक्षा घेरा बनाने वाली टीम के प्रभारी और बाढ़ खंड के सहायक अभियंता अखिलेश कुमार ने कहा है कि डैम से छोड़े जा रहे पानी के बारे में लिखित और वास्तविक सूचना में कोई फर्क है। पानी कब्रों के ऊपर से गुजरता हुआ पीछे की ओर करीब 20 मीटर तक पहुंच गया है। यह अभी और तेजी से फैल रहा है। सहायक अभियंता ने बताया कि घेराबंदी में चुआन का पानी पहले आ गया। इसे रोकना पहले भी मुश्किल था, जो अब और ज्यादा मुश्किल हो गया है।

पर्देदारी की कोशिश भी नाकाम

अटैना घाट पर दोनों लड़कियों के दोबारा पोस्टमार्टम के दौरान सब कुछ पर्दे में रखने की कोशिश जरूर हुई लेकिन तेज हवा चलने से स्थानीय प्रशासन और सबीबीआई नाकाम हो गए। शाम होते-होते यहां लगाए गए तंबू उड़ गए। यही नहीं, लगातार शवों की हिफाजत करने में जुटे मजदूर भी तब तक थक चुके थे।

शनिवार सुबह से ही अटैना गंगा घाट पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का जमावड़ा शुरू हो गया था। इसके बाद सीबीआई और फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम पहुंचीं। दोपहर करीब एक बजे गंगा का वह स्थान जहां पर शव दफन हैं, तंबू लगाकर कवर्ड कर दिया गया।

करीब बीस मीटर एरिया में होले के पाइप लगाकर तंबू लगा दिया गया। दोपहर बाद शव वाले स्थान पर मीडिया के साथ आम लोगों के आने पर भी पाबंदी लगा दी गई लेकिन शाम को तेज हवाएं चलने से तंबू बेमतलब हो गए।
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डॉक्टरों की लेटलतीफी से हुई देरी

जिला अस्पताल के तीन डॉक्टरों डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. राजीव गुप्ता और जिला महिला अस्पताल की डॉ. पुष्पापंत त्रिपाठी ने 28 मई को दोनों लड़कियों के शवों का पोस्टमार्टम किया था। शनिवार को जब शवों को फिर से पोस्टमार्टम के लिए निकाला जाना था, तो इन डॉक्टरों को भी तलब किया गया। इसकी सूचना जिला अस्पताल पहुंची तो पता चला कि डॉ. राजीव गुप्ता और डॉ. अवधेश कुमार जिला मुख्यालय पर नहीं हैं।

इसके बाद आनन-फानन में दोनों डॉक्टरों को बुलाया गया। तीनों डॉक्टर काफी देर से अटैना घाट पहुंचे। ऐसे में ऑपरेशन भी लेट हो गया। डॉ. अवधेश कुमार बुलंदशहर और डॉ. राजीव गुप्ता को बरेली से बदायूं तक पहुंचने में करीब ढाई घंटे का वक्त लग गया।

ऐसे में डॉक्टरों का ये पैनल दोपहर करीब तीन बजे अटैना घाट पहुंच सका। यहां सीबीआई ने इनसे बातचीत की और इसके बाद ही शवों को निकालने की मशक्कत शुरू की गई। डॉक्टरों के देरी से पहुंचने की वजह से शवों को जमीन से निकालने का काम देर से शुरू हो सका।
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