सीबीआई ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सहायक और पूर्व निजी सचिव विसेंट जार्ज के खिलाफ अवैध संपत्ति के मामले को सबूत नहीं मिलने की वजह से बंद कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने अमेरिकी प्राधिकरण से इस संबंध में सबूत मांगे थे लेकिन दस साल बाद भी वह नहीं मिलने पर जांच एजेंसी ने यह कदम उठाया है।
जार्ज पर 1990 के बाद अवैध ढंग से करोड़ों रुपये की संपत्ति जुटाने का आरोप है।
उन पर दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके में व्यावसायिक और रिहायशी संपत्ति जुटाने के अलावा बंगलूरू, चेन्नई और केरल में संपत्ति के साथ दिल्ली की सीमा पर कृषि योग्य भूमि गैर कानूनी ढंग से खरीदने के आरोप हैं।
इसके अलावा डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बैंक में रखने के आरोप हैं। जार्ज पर सारी संपत्ति विदेश में मिली रकम से खरीदने के आरोप है।
वैसे उनका दावा है कि परिजनों के उपहार की रकम से यह संपत्ति खरीदी गई। सूत्रों के अनुसार नकदी विदेश में पहले हवाला राशि के रूप में ली गई होगी। जिसे बाद में उपहार के रूप में जार्ज को लौटा दिया गया होगा।
अमेरिकी प्राधिकरण से नकदी के ऐसे अवैध हस्तांतरण के संबंध में किसी तरह की जानकारी नहीं मिलने से प्रकरण को बंद करना पड़ा।
सीबीआई ने जार्ज से संबंधित दो कंपनियों के व्यावसायिक हस्तांतरण पर भी विस्तार से जानकारी मांगी थी।
इन कंपनियों को अवैध रूप से जार्ज की पत्नी चलाती है। आशंका थी कि कंपनियां अन्य माध्यमों से आरोपित काले धन का कानूनी हस्तांतरण की होंगी।