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सीबीआई बनेगी हथियार, ये होंगे भावी सरकार के संकटमोचक!

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केंद्र में भावी सरकार जिसकी भी बने, उसके लिए एक अच्छी खबर है। सरकार बनने से पूर्व ही उसके लिए संकटमोचक बनने वाले दलों की सूची और लंबी हो गई है।
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यूपीए सरकार के कार्यकाल में सीबीआई जांच के रडार पर रहे मुलायम सिंह यादव, मायावती और लालू प्रसाद यादव को बार-बार और चाहे-अनचाहे संकटमोचक बनना पड़ा था।

अब बारी शारदा चिट फंड घोटाला मामले में सीबीआई जांच के रडार पर आई तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी की है। इसके अलावा संकटमोचक न बनने के कारण यूपीए सरकार के कार्यकाल में जेल की हवा खा चुके वाईएसआर कांग्रेस के मुखिया जगनमोहन रेड्डी भी नई सरकार की हर मुश्किल आसान करते देखे जा सकते हैं।
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सीबीआई के शिकंजे में फंसी ममता हैं सबसे आसान शिकार

उल्लेखनीय है कि ये सभी नेता फिलहाल विभिन्न मामलों में सीबीआई जांच के घेरे में है।

अब केंद्र की भावी सरकार भी यूपीए सरकार की तरह ही सदन में अपने फैसले को बहुमत में बदलने से लेकर जरूरी निर्णय कराने और बिल पारित कराने के मामले में इन नेताओं की पार्टी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

जाहिर है कि ऐसी स्थिति न आने देने के लिए इन नेताओं की कोशिश ऐसी सरकार बनाने की होगी, जिनका इनके बिना बात नहीं बन पाए। हालांकि जिस प्रकार एक्जिट पोल और चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में भाजपा और राजग को बढ़त दिखाई गई है, उससे इन नेताओं की इच्छा पूरा होने की संभावना नहीं दिखती।

शारदा चिट फंड घोटाले में सीबीआई जांच के है आदेश्‍ा

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल का चर्चित शारदा चिट फंड घोटाले की जांच सीबीआई से कराने का फैसला कर जहां ममता की परेशानी बढ़ा दी है, वहीं केंद्र के भावी सरकार की राह आसान कर दी है।

इस फैसले के साथ ही भावी सरकार के जाल में ममता बनर्जी के रूप में एक बड़ी राजनीतिक मछली फंस गई है।

चूंकि इस चिट फंड से तृणमूल के कई दिग्गज नेता सीधे और परोक्ष रूप से जुड़े हैं, इसलिए अगर सरकार चाहे तो सीबीआई के सहारे किसी भी समय ममता के लिए सियासी संकट खड़ा कर सकती है।
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जगनमोहन भी होंगे नए संकटमोचकों की टीम में

उधर यूपीए सरकार के कार्यकाल में लालू, मुलायम और मायावती की तरह ही सीबीआई जांच की रडार पर रहे जगनमोहन ने अपने विद्रोही तेवर की सजा जेल जा कर भुगती।

जगनमोहन नहीं चाहते होंगे कि केंद्र की सत्ता में परिवर्तन के बाद भी उन्हें उन्हीं पुरानी परिस्थितियों से दो चार होना पड़े।

जाहिर है कि जगनमोहन भी भावी सरकार का संकटमोचक बन कर परेशानी से बचे रहना चाहेंगे।  वैसे भी भाजपा का भरोसा है कि जरूरत पड़ने पर जगनमोहन राजग का दामन थामने से गुरेज नहीं करेंगे।
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