कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग का 55 साल की उम्र में शनिवार को निधन हो गया। सुधीर आम आदमी की जरूरतों, उसकी समस्याओं और उसकी बातों को बेहद शिद्दत से महसूस करते थे।
उन्होंने अपने कार्टूनों के केंद्र में हमेशा 'आम आदमी' को रखा। हालांकि उनका वह आम आदमी आरके लक्ष्मण के 'कॉमन मैन' की तरह स्थापित नहीं हो सका।लेकिन वो आम आदमी की बातों को हमेशा उठाते रहे।
उनकी ड्रॉइंग एकदम साफ-सुथरी होती थी। उसमें उतनी चीजें ही होती थीं, जितनी अपनी बात कहने के लिए जरूरी हों, अतिरिक्त कुछ भी नहीं होता था।
सुधीर के कार्टूनों में ब्रश के स्ट्रोक्स काफी साफ होते थे। वे उनमें ढेर सारे ट्विस्ट डालते थे। वे कटाक्ष करते थे। आरके लक्ष्मण के कार्टून में तकनीकी चीजें ज्यादा होती थीं लेकिन आप बहुत अधिक प्रैक्टिस न करें, तो भी तैलंग के कार्टूनों को समझ सकते हैं। यह सादगी उनके चित्रों में होती थी।