होली का त्यौहार भारत में ही नहीं, बल्कि कैरिबियाई देशों में भी बड़े धूमधाम और मौज-मस्ती के साथ मनाया जाता है। यहां होली को फगुआ के नाम से जाना जाता है और लोग इसे परंपरागत तरीके से मनाते हैं।
19वीं सदी के आखिरी और 20वीं सदी के शुरू में भारतीय लोग मजदूरी करने के लिए कैरिबियाई देश गए थे। इस दरम्यान गुआना और सुरिनाम तथा ट्रिनीडाड जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय जा बसे। भारतीय लोगों के साथ उनके त्यौहार और रस्मों-रिवाज भी इन देशों में पहुंचे। धीरे-धीरे फगुआ गुआना और सूरीनाम के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में एक हो गया। गुआना में होली के दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है।
इस देश की कुल आबादी में हिंदुओं का प्रतिशत लगभग 33 हैं। यहाँ की लड़कियों और लड़कों को रंगीन पाउडर और पानी के साथ खेलते हुए बड़े आराम से देखा जा सकता है। गुआना के गांवों में इस अवसर पर विशेष तरह के समारोहों का आयोजन किया जाता है। कैरिबियाई देशों में कई सारे हिंदू संगठन और सांस्कृतिक संगठन सक्रिय हैं। ये संगठन नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक उत्सवों के ज़रिए फगुआ मनाते हैं।
ट्रिनीडाड एंड टोबैगो में होली को काफ़ी कुछ उसी तरह से मनाया जाता है, जैसे भारत में मनाया जाता है। हाल के वर्षों में इसकी रौनक में वृद्धि हुई है। विदेशी विश्वविद्यालयों में भी होली का आयोजन होता रहा है। भले ही वह किसी संस्था के लिए चंदा जमा करने के उद्देश्य से ही क्यों न हो। विलबर फ़ोर्ड के स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी कैंपस पर होली के कुछ सुंदर दृश्य देखे जा सकते हैं। इसी प्रकार रिचमंड हिल्स में होली के कुछ दृश्य भी हैं।