सीनियर आईएएस अफसर अशोक खेमका ने आरोप लगाया है कि उन्हें सीएलयू, लाइसेंस देने में हो रही खुली लूट का खुलासा करने के कारण पेरशान किया जा रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ की डील के तहत खरीदी गई जमीन का इंतकाल (म्युटेशन) रद्द करने वाले अशोक खेमका ने कटाक्ष करते हुए डील रद्द करना अपना सबसे बड़ा अपराध माना है।
मुख्य सचिव पीके चौधरी को खेमका ने सोमवार को 11 पेज का पत्र लिखा है। मुख्य सचिव कार्यालय में सोमवार की शाम पत्र पहुंच गया था। मगर कार्यालय ने उसे प्रोसेस नहीं किया है।
खेमका ने मुख्यमंत्री हुड्डा के प्रधान सचिव एसएस ढिल्लों पर आरोप लगाया है कि वे उनके खिलाफ सीनियर अफसरों के साथ एक हो गए हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई इसलिए की जा रही है क्योंकि वे मुख्यमंत्री और राजनीतिक आकाओं के अनुसार काम करने में फेल रहे हैं।’
खेमका ने पत्र में लिखा, ‘मेरा सबसे बड़ा अपराध 15 अक्तूबर, 2012 को वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट और डीएलएफ यूनिवर्सल का इंतकाल रद्द करना था।
गेहूं बीज की कम बिक्री पर मुझे चार्जशीट करने की मीडिया में घोषणा करने से पहले मुझे कम से कम अपना पक्ष रखने का एक मौका तो देते।
चैनलों पर कैबिनेट मंत्री रणदीप सुरजेवाला, कांग्रेस की प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने भी मुझे चार्जशीट करने के फैसले को सही ठहराया था।’
ढिल्लों, सैनी मिले हुए
खेमका ने न केवल मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एसएस ढिल्लों पर उंगली उठाई बल्कि कृषि विभाग के प्रधान सचिव रोशन लाल सैनी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के प्रधान सचिव टीसी गुप्ता को भी लपेटे में ले लिया।
खेमका ने लिखा, ‘ढिल्लों मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव बनने लायक न तो 31 मार्च और न ही एक जुलाई को थे। मगर छतर सिंह के यूपीएससी चले जाने के बाद उनकी योग्यता इस पद के लिए कैसे हो गई? ढिल्लों ने वाड्रा को कॉमर्शियल लाइसेंस दिया था। अब मुख्यमंत्री कार्यालय में वे ही मेरे से जुड़ी फाइलें देख रहे हैं।’
'खेमका को नहीं किया जा रहा प्रताड़ित'
सीएम के प्रधान सचिव एसएस ढिल्लों ने अमर उजाला के पूछने पर कहा कि उन्हें मीडिया से ही जानकारी मिली है कि अशोक खेमका ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। मगर यह जरूर है कि गेहूं बीज की कम बिक्री मामले में खेमका का बीज विकास निगम के एमडी के नाते पक्ष लिया गया था। उन्हें चार्जशीट करने की सिफारिश मुख्य सचिव से मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंची थी जिसे मंजूरी दे दी गई। ढिल्लों ने कहा कि सीएलयू या लाइसेंस देने में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं हुई है। सब नियमानुसार हुआ है।
तो सचिन जैसा खिलाड़ी नहीं होता पैदा
यही नहीं अशोक खेमका ने ट्विटर पर भी अपनी भड़ास निकालते हुए कहा, ‘क्या खराब अंपायरों, पक्षपातपूर्ण नियमों और खराब मैदान में सचिन तेंदुलकर जैसा खिलाड़ी पैदा हो पाता? अच्छी सरकार ही ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराती है, जिनमें आम नागरिक विजेता बनकर उभरता है।’
वहीं, आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट करके इस मामले पर अपना विरोध जताया है। उन्होंने लिखा है, 'क्यों अशोक खमेका को प्रताड़ित किया जा रहा है? मैं उनके लिए बहुत बुरा महसूस कर रहा हूं। एक ईमानदार अधिकारी के खिलाफ आरोपपत्र दायर करके सरकार क्या संदेश देना चाहती है?