विकासशील राज्यों में शुमार हरियाणा स्वच्छता के मामले में अभी भी निचले पायदान पर है। आर्थिक समृद्धि के बावजूद राज्य की एक तिहाई आबादी खुले में शौच जाना पसंद करती है। ज्यादातर लोग जहां परंपरागत रूप से खुले में शौच करते हैं, वहीं अधिकांश घरों में शौचालय ही नहीं है।
यह स्थिति तब है जब राज्य में शौचालय नहीं तो दुल्हन नहीं का नारा बुलंद है। घर में शौचालय के बगैर यहां के गांवों में शादियां नहीं हो रही हैं। फिर भी स्थिति ऐसी है कि हरियाणा की पंचायतों को निर्मल बनने में अभी दो वर्ष से ज्यादा का समय लग सकता है।
ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के मुताबिक पिछले एक दशक में स्वच्छता अभियान के नाम पर हजारों करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक सिर्फ सिक्किम ही देश का एक मात्र ऐसा राज्य है जो खुले में शौच मुक्त हुआ है। केरल भी जल्द ही खुले में शौच मुक्त हो जाएगा, जबकि अन्य राज्यों को खुले में शौच मुक्त होने के लिए अभी भी एक से दस वर्ष का समय लग सकता है।
हिमाचल प्रदेश जहां अगले वर्ष तक पूर्ण रूप से स्वच्छ राज्य बन जाएगा, वहीं हरियाणा ने सभी ग्राम पंचायतों को निर्मल बनाने के लिए मार्च 2014 की समय सीमा निर्धारित की है। पर स्वच्छता अभियान के मौजूदा रफ्तार से निर्धारित समय में लक्ष्य को पाना कड़ी चुनौती है।
रमेश के मुताबिक उत्तर प्रदेश और बिहार में स्थिति सबसे अधिक खराब है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और उड़ीसा आदि राज्यों की सभी ग्राम पंचायतों को निर्मल बनाना बड़ी चुनौती है। हालांकि सरकार ने इस साल 29,500 ग्राम पंचायतों को निर्मल बनाने का लक्ष्य रखा है। मौजूदा समय 2.50 लाख ग्राम पंचायतों में सिर्फ 28,000 ग्राम पंचायतें ही निर्मल हो पाई हैं।