छह महीने के बाद आखिरकार झारखंड में फिर से लोकतांत्रिक सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। इस बार झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की पहल की है।
झामुमो की ओर से सरकार बनाने का दावा पेश किए जाने के बाद राज्य के राज्यपाल ने बुधवार को केंद्र सरकार से राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश की थी, जिस पर बृहस्पतिवार को केंद्रीय कैबिनेट ने मुहर लगा दी।
सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने बताया कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में झारखंड से राष्ट्रपति शासन हटाने का फैसला किया गया। प्रदेश में 18 जनवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है।
झामुमो विधायक दल के नेता हेमंत सोरेन ने मंगलवार को राज्यपाल को अपने समर्थक विधायकों की सूची सौंपी थी। झामुमो का समर्थन कांग्रेस, राजद और अन्य छोटे दल कर रहे हैं। कुछ निर्दलीय विधायक भी सोरेन के साथ हैं।
झारखंड में 82 विधानसभा सीटें हैं। सोरेन को 43 विधायकों का समर्थन हासिल है। इनमें से 18 झामुमो, 13 कांग्रेस, पांच राजद, सात छोटे दलों के या फिर निर्दलीय विधायक शामिल हैं।
हेमंत 13 को ले सकते हैं सीएम पद की शपथ
झामुमो विधायक दल के नेता हेमंत सोरेन ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह 13 जुलाई को राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाने की अभी उन्हें आधिकारिक सूचना नहीं मिली है, लेकिन उनकी जानकारी के अनुसार केंद्रीय कैबिनेट ने राज्यपाल के प्रस्ताव को मंजूर करते हुए राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश कर दी है।
सोरेन ने कहा कि अगर उन्हें आधिकारिक जानकारी मिल जाती है तो वे 13 जुलाई को सीएम पद की शपथ ले लेंगे।