केंद्र सरकार लोकपाल बिल में आधिकारिक संशोधन को बृहस्पतिवार को मंजूरी दे सकती है। इसमें एक संशोधन के तहत राज्यों में लोकायुक्त के गठन को केंद्र सरकार के बिल से अलग रखा जाएगा।
इन संशोधनों को सलेक्ट कमेटी के पास भेजने से पहले इस साल 21 मई को राज्य सभा में भेजा गया था। पिछले महीने सलेक्ट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सदन के पटल पर रख दी है और अब ऐसे में आधिकारिक घोषणा महज एक औपचारिकता ही है। मगर कैबिनेट से इसे पारित होना भी जरूरी है।
इन आधिकारिक संशोधनों के अनुसार लोकपाल को लोकायुक्त से अलग रखा जाएगा, सिर्फ सरकारी अनुदान पाने वाले एनजीओ ही लोकपाल के दायरे में आएंगे और लोकपाल की नियुक्ति पर फैसला ज्यादा संगठित संस्था लेगी, जिसमें सरकार का वर्चस्व नहीं होगा। इस विवादित बिल को पिछले साल लोकसभा में पारित होने के बाद राज्य सभा में विपक्षी पार्टियों का विरोध झेलना पड़ रहा था। उनका कहना था कि प्रत्येक राज्य में लोकायुक्त नियुक्त करने को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री, बाहरी व आंतरिक सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा, अंतरराष्ट्रीय संबंध और पब्लिक आर्डर जैसे मुद्दों को भी लोकपाल के दायरे से बाहर रखा गया है। सलेक्ट कमेटी ने आरक्षण के प्रावधान में कोई बदलाव नहीं किया है। मूल प्रावधान के अंतर्गत लोकपाल सदस्यों में एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और महिलाओं की संख्या 50 फीसदी से कम नहीं होनी चाहिए।