मौजूदा टेलीकॉम ऑपरेटरों को 2जी स्पेक्ट्रम अपने पास बनाए रखने के लिए अब एकमुश्त फीस सरकार को चुकानी होगी। कैबिनेट ने बृहस्पतिवार को उच्चाधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) के इस सुझाव को स्वीकार कर लिया कि सभी मौजूदा टेलीकॉम कंपनियों को एकमुश्त शुल्क अदा करना चाहिए।
इस फैसले से सरकार को 31 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व मिलने की उम्मीद है। लेकिन आशंका यह भी है कि सरकार के इस कदम से उपभोक्ताओं पर बढ़ी कॉल दरों का बोझ पड़ सकता है। टेलीकॉम कंपनियां पहले ही नए सिरे से स्पेक्ट्रम की नीलामी और एकमुश्त फीस लेने की स्थिति में कॉल दरें 30-40 फीसदी तक बढ़ाने की बात कह चुकी हैं।
हालांकि कैबिनेट के फैसले की घोषणा करते हुए दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि एकमुश्त फीस लेने के फैसले से उपभोक्ताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। फैसले में जीएसएम सेवाएं देने वाली ऐसी कंपनियों से एकमुश्त फीस लेने की बात है, जिनके पास 4.4 मेगाहर्ट्ज से ज्यादा का स्पेक्ट्रम है।
इसके तहत कंपनियों को 6.2 मेगाहर्ट्ज से ज्यादा के स्पेक्ट्रम पर 2008 से फीस की राशि चुकानी होगी। हालांकि कंपनियों के पास यह भी विकल्प होगा कि वह मौजूदा स्पेक्ट्रम के लाइसेंस वापस लौटा दें। कंपनियां एकमुश्त राशि की फीस बची लाइसेंस अवधि में 9.75 फीसदी ब्याज के आधार पर चुका सकेंगी।
कंपनियों को एकमुश्त फीस के रूप में 12 नवंबर से शुरू होने वाली 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के आधार पर तय फीस देनी होगी। कैबिनेट ने सीडीएमए ऑपरेटरों के लिए एकमुश्त फीस की राशि पर कोई फैसला नहीं किया है। सीडीएमए पर फैसला न ले पाने की एक प्रमुख वजह स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए किसी ऑपरेटर का रुचि नहीं दिखाना रहा है।
ऐसे में इसके लिए दूरसंचार विभाग अलग से दिशानिर्देश जारी करेगा। सीडीएमए ऑपरेटरों को 2.5 मेगाहर्ट्ज से ज्यादा का स्पेक्ट्रम रखने पर एकमुश्त फीस देनी है। सरकार की सीडीएमए ऑपरेटर्स से नीलामी के जरिए छह हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना है।
सीडीएमए ऑपरेटरों की तरह ही जीएसएम ऑपरेटरों में भी स्पेक्ट्रम नीलामी के प्रति ज्यादा उत्साह नहीं है। अभी तक केवल पांच ऑपरेटरों ने ही नीलामी में रुचि दिखाई है। उसमें भी किसी ने भी पूरे देश के लिए बोली में भाग लेने का आवेदन नहीं किया है।