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सरकारी चंगुल से मुक्त होगी सीबीआई

Fri, 28 Jun 2013 12:20 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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सीबीआई रूपी ‘तोते’ को अब बंद पिंजरे से ‘आजादी’ मिलने की उम्मीद जग गई है। कैबिनेट ने बृहस्पतिवार को सीबीआई को सरकारी दखलंदाजी से स्वतंत्र करने की मंत्रियों के समूह (जीओएम) की सिफारिशों को हरी झंडी दे दी।
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इन सिफारिशों को केंद्र सरकार अगले महीने सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी। उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों के मुताबिक अवकाशप्राप्त जजों के पैनल द्वारा सीबीआई के संवेदनशील मामलों की निगरानी के प्रस्ताव पर कैबिनेट में आम सहमति बनी है। हालांकि सरकार ने इस बारे में औपचारिक खुलासा नहीं किया है।

सूत्रों ने बताया कि उन सभी मामलों पर इन जजों की निगाह रहेगी जो सरकार से संबंधित होंगे। हालांकि अभी यह साफ नहीं हो सका है कि यह निगरानी किस तरीके से की जाएगी।
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जीओएम ने दिल्ली पुलिस स्पेशल पावर एक्ट में संशोधन कर सीबीआई को सरकारी तंत्र से दूर रखने के कई उपाय सुझाए हैं। इनमें सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के मौजूदा तरीके को बदलने की पेशकश भी की गई है।

गौरतलब है कि जीओएम ने सीबीआई के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसके तहत एजेंसी ने विशेष सचिव के ऊपर के स्तर के अधिकारियों के लिए सरकार से अनुमति की अनिवार्यता को खत्म करने को कहा था। शुक्रवार को कैबिनेट की ब्रीफिंग में इन बदलाव के बारे में विस्तार के बताया जाएगा।

गौरतलब है कि कोयला घोटाले की सुनवाई के दौरान नाराज सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सीबीआई को राजनीतिक और सरकारी तंत्र के दखल से मुक्त करने के उपाय सुझाने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद केंद्र ने वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अगुवाई में जीओएम का गठन किया।

मामले की सुनवाई 10 जुलाई को होनी है। सूत्रों ने बताया कि सरकार राज्यसभा में विचाराधीन लोकपाल बिल के बारे में भी सर्वोच्च न्यायालय को अवगत करा सकती है।

राज्यसभा की चयन समिति ने सिफारिश की थी कि सीबीआई निदेशक का चयन प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की संयुक्त रजामंदी से होना चाहिए।
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