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समय पर काम नहीं करने पर देना होगा जुर्माना

Thu, 07 Mar 2013 09:28 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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सरकारी बाबुओं के ढुलमुल रवैये से आए दिन हम परेशानी झेलते आए हैं। राशन कार्ड बनवाना हो या पेंशन पाना, जब तक सरकारी दफ्तरों के दर्जन भर चक्कर न काट लें, काम होता ही नहीं।
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मगर अब इस समस्या से जल्द ही निजात मिल जाएगी और तय समय सीमा के भीतर सरकारी कार्यालय अपनी सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘राइट टू टाइम बाउंड डिलीवरी ऑफ पब्लिक सर्विसेज’ विधेयक यानी समय पर सेवा दिलाने वाले बिल को मंजूरी मिल गयी है।

सरकार ने उम्मीद व्यक्त की है संसद के इसी बजट सत्र में यह विधेयक पारित हो जाएगा। बिल में सरकार प्रत्येक सेवा के लिए एक समय सीमा निर्धारित करेगी।

उक्त समय सीमा पर काम न होने पर संबंधित विभाग के अधिकारी पर 250 रुपये रोजाना की दर से जुर्माना वसूलने का प्रावधान किया गया है, जो उसके वेतन से काटा जाएगा।
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विधेयक में समय पर सेवा दे पाने में विफल रहने वाले किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

बताया जा रहा है कि प्रवासी भारतीयों को विधेयक के दायरे में लाने के मुद्दे को कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय और कानून मंत्रालय अलग-अलग देखेंगे।

प्रस्तावित विधेयक सरकारी प्राधिकार के लिए कॉल सेंटर, कस्टमर केयर सेंटर, सहायता केंद्र और लोक प्रोत्साहन प्रणाली स्थापित करने को अनिवार्य बनाएगा ताकि सेवाओं को समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराना सुनिश्चित हो सके।

विधेयक में केंद्र एवं राज्य स्तर पर लोक शिकायत निवारण आयोग बनाने का भी प्रस्ताव है। आयोग के फैसले से नाराज कोई व्यक्ति केंद्र के लोक शिकायत निवारण आयोग के फैसले के मामले में केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त के समक्ष अपील दायर कर सकता है।

क्या होगा खास
बिल में प्रत्येक सेवाओं यानी सरकारी प्राधिकार के लिए सिटीजन चार्टर प्रकाशित करने संबंधी दायित्व को तय किया गया है। इसमें इस बात का उल्लेख होगा कि कोई कार्य कितने दिन में होगा और कितने समय में सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके साथ ही यदि सरकारी अधिकारी समय पर कार्य करने के प्रावधानों का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें जुर्माना भरना होगा। इसके अलावा नागरिकों की शिकायतों के निपटारे के लिए एक तंत्र भी बनाया जाएगा।

विवादों से घिरा सिटीजन चार्टर बिल
सिटीजन चार्टर विधेयक संसद में पेश होने से पहले ही विवादों में घिर गया है। भाजपा ने इस प्रस्तावित कानून को राज्यों के लिए भी अनिवार्य कर देने संबंधी केंद्र सरकार के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है।
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पार्टी ने संविधान और देश के संघीय ढांचे का हवाला देकर कहा कि यह मामला राज्यों पर जबरदस्ती नहीं थोपा जाना चाहिए।
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