फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

2014 में ना मोदी की चलेगी, ना राहुल की

Thu, 17 Oct 2013 03:52 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
आगामी लोकसभा चुनावों में किसी भी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपनी पार्टियों को सत्ता की पहुंच तक लाने में कामयाब नहीं हो पाएंगे।
विज्ञापन


टाइम्स नाउ, इंडिया टीवी और सी-वोटर्स के चुनावी सर्वेक्षण में इस बात का खुलासा हुआ है। सर्वेक्षण के मुताबिक तीसरा मोर्चा बहुमत के सबसे पास नजर आ रहा है और उसको 240 लोकसभा सीट प्राप्त हो सकती हैं।

नरेंद्र मोदी को भी अगर प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचना होगा तो इसके लिए उन्हें क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की खुशामद करनी होगी।

लोकसभा चुनावों में किंगमेकर की भूमिका क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां निभाएंगी। सत्ता की चाबी इन क्षेत्रीय दलों के हाथों में होगी।

सर्वेक्षण के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा चुनावों में फायदा होने जा रहा है। पर वो 162 सीटों के आंकड़े तक ही पहुंच पाएगी। वहीं कांग्रेस की सीटों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिलेगी। कांग्रेस की सीटें घटकर 102 हो जाएंगी।
विज्ञापन


भारतीय जनता पार्टी और उनकी सहयोगी पार्टियों के गठबंधन एनडीए को 186 सीटें मिलेंगी। इसके बावजूद वह केंद्र की सत्ता से काफी दूर है।

16 अगस्त से 15 अक्टूबर के बीच चुनिंदा 24 हजार 284 लोगों के बीच इंडिया टीवी, टाइम्स नाउ और सी वोटर के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण में आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और केरल में कांग्रेस को भारी नुकसान दिखाया गया है।

इन राज्यों में उसे पिछली बार अच्छी खासी सीटें मिली थीं। भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश और बिहार में अच्छा लाभ मिलने की बात कही गई है, जबकि राजस्थान में भी उसके सत्ता में फिर से लौटने की भविष्यवाणी की गई है।

विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को नुकसान
राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ जैसे चार राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों भी काफी अहम साबित होने वाले हैं। चुनावी सर्वेक्षण में राजस्थान, मध्यप्रदेश, दिल्ली में कांग्रेस को भारी नुकसान होने और केवल छत्तीसगढ़ में उसके लिए उम्मीद की किरण बचे होने की भविष्यवाणी की गई है।

सत्ता में आने के लिए एनडीए को चाहिए सीटें मोर
चुनावी सर्वेक्षण के अनुसार बीजेपी, शिवसेना, अकाली दल, आरपीआई (अठावले) मेघालय की एनसीपी और हरियाणा जनहित कांग्रेस वाले एनडीए को 186 सीटें, जबकि यूपीए को अपने मौजूदा सहयोगियों के साथ मात्र 117 सीटें मिलने की बात कही गई है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन को 259 सीटें जबकि एनडीए को 159 सीटें मिली थीं।

तीसरे मोर्च की आहट
सर्वेक्षण के मुताबिक इस बार केंद्र में सत्ता की चाबी कुछ क्षेत्रीय दलों के हाथों में होगी, जिनमें एआईएडीएमके, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, वाम मोर्चा, तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी, बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस और टीएसआर शामिल हैं। इन सभी के लोकसभा की 543 सीटों में से 240 पर जीत हासिल करने की संभावना है।

कांग्रेस को होगा सबसे ज्यादा घाटा
कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीटों का अंतर भी बढ़ने की संभावना जताई गई है, क्योंकि सर्वेक्षण में कांग्रेस को केवल 102 और बीजेपी को 162 सीटें मिलने की बात कही गई है। पिछली बार कांग्रेस ने 206 और बीजेपी ने 116 सीटें जीती थीं। सर्वेक्षण के मुताबिक कांग्रेस 2009 में जीती गई अपनी सीटों में से लगभग 50 फीसदी खो देगी। भारतीय जनता पार्टी अपने प्रदर्शन में करीब 40 फीसदी का सुधार करेगी।

वाम दलों के खाते में 32 सीटें और मायावती की बीएसपी के 31 सीटों पर कब्जा जमाने की भविष्यवाणी की गई है। उत्तर प्रदेश में बीएसपी की धुर प्रतिद्वंद्वी मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी को 25, जयललिता की एआईएडीएमके को 28 और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को 23 सीटें मिलने की उम्मीद है।

लालू के जेल जाने का पार्टी को होगा फायदा
लालू प्रसाद के आरजेडी को 14 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गई है जो इस बात का संकेत है कि चारा घोटाले में सुनाई गई सजा के बावजूद उनके कद में कोई कमी नहीं आई है। सर्वेक्षण कहता है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यू को मात्र नौ सीटें मिलेंगी। उसने मोदी को बीजेपी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के विरोध में एनडीए से संबंध तोड़ लिए थे।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें