फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ड्रैगन की मंशा भांप कर भारत ने बढ़ाई सतर्कता

Tue, 21 Jul 2015 01:06 AM IST
शशिधर पाठक, दिनेश मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
भारतीय समुद्री क्षेत्र से पाकिस्तान के ग्वादर तक चीन की पनडुब्बी जाने और दक्षिण चीन सागर में ‘ड्रैगन’ की मंशा को भांपकर भारत ने सतर्कता बढ़ा दी है।
विज्ञापन


चीन हांगकांग और सनाया बंदरगाह से पाकिस्तान के ग्वादर होते हुए प्यूरटो (सूडान) तक निरंतर पहुंच बनाने की फिराक में है। उच्चपदस्थ खुफिया सूत्रों के अनुसार मालदीव के मराओ बंदरगाह पर भी वह पकड़ मजबूत करने में लगा है।

ऐसे में भारत ने जहां अंडमान निकोबार द्वीप में सैन्य निगरानी बढ़ा दी है, वहीं ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास को अपना तुरुप का पत्ता बनाना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
Trending Videos

विमानों ने शुरु की निगरानी

मलक्का क्षेत्र और हिंद महासागर ड्रैगन की आंख में किरकिरी बन रहा है। इसे साधने के लिए सितवे (म्यांमार) और चटगांव बंदरगाह (बांग्लादेश) पर चीन की निगाह है, वहीं हंबनटोटा (श्रीलंका) तक लगातार उसकी पकड़ मजबूत हो रही है।

इसे देखते हुए भारत ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह और चेन्नई में सैन्य क्षमता बढ़ाना शुरू कर दिया है। कार निकोबार हवाई अड्डे को देश सभी लड़ाकू विमानों और लॉजिस्टिक सपोर्ट के विमानों के ऑपरेशन को देखते हुए उन्नत बनाया जा चुका है।

यहां तक कि चेन्नई और अंडमान में अमेरिका से आए पी-8 आई नौसैनिक विमान ने भी समुद्र की निगरानी करना शुरू कर दिया है। अंडमान के पास विध्वंसक और युद्धपोतों की बड़े पैमाने पर तैनाती सुनिश्चित की जा रही है।

चाबहार बंदरगाह विकसित करेगा भारत

सुखोई-30 एमकेआई जैसे अग्रिम पंक्ति के विमानों को लगातार कारनिकोबार हवाई अड्डे पर सजग रखने से लेकर इस क्षेत्र के लगभग सभी मानव रहित द्वीपों को तेजी से निगरानी के दायरे में लाया जा रहा है। लक्ष्यद्वीप में भी सैन्य तैनाती बढ़ाई जा रही है।

फिलवक्त भारत की निगाह ईरान के चाबहार बंदरगाह पर है। मई 2015 में भारत और ईरान ने इस बाबत एक सहमति पत्र पर दस्तखत भी किया है।

भारत चाबहार बंदरगाह को विकसित करके 10 साल के लिए इसकीदो गोदी पट्टे पर लेगा। वहीं मालदीव से संपर्क मजबूत करने के साथ-साथ सेशल्स में बंदरगाह विकसित करने तथा उसे इलेक्ट्रॉनिक और अन्य निगरानी उपकरणों से सुसज्जित करने की योजना है।

आखिर चाबहार ही क्यों?

चीन पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को विकसित कर रहा है। वह ग्वादर से पाक अधिकृत कश्मीर होते हुए अपने शिनजियांग प्रांत तक सिल्क रूट विकसित कर रहा है।

वहीं, ईरान का चाबहार इससे 72 किमी और आगे हॉर्मुज के मुहाने पर है। यह हिंद महासागर में प्रवेश करने का इकलौता समुद्री रास्ता है। तेल और मालवाहक जहाजों का बड़ा मार्ग है।

ऐसे में चाबहार से ही भारत ग्वादर से होने वाली निरंतर आवाजाही पर नजर रख सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान में गए बिना ईरान के सड़क और रेल मार्ग से अफगानिस्तान तक पहुंचा जा सकेगा। मध्य एशिया, रूस के सीधे संपर्क में आ सकेगा। ईधन तेल, यूरिया के आयात में सहूलियत तथा परिवहन सुविधा मिलेगी।

32 नौसैनिक पोत का लक्ष्य

अमेरिका, जापान के सहयोग से समुद्री पैठ बनाए रखना, ढाई दर्जन हिंद महासगरीय देशों के साथ नौसैनिक सेमिनार, मौसम और सूचनाओं का साझा, समुद्री डकैती से निबटने में सहयोग और अन्य प्रमुख देशों के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास की नीति से समुद्री हितों की रक्षा करना।

भारत ने 2022 तक इन द्वीपों पर 32 नौसैनिक पोतों की तैनाती तथा पनडुब्बियों की क्षमता बढ़ाने में जुटा है। पनडुब्बी में ब्रह्मोस की तैनाती, के-15 और अन्य ‘अंडरवाटर’ परियोजनाओं पर कार्य जारी है।

वहीं इस मामले में मेजर जनरल(पूर्व) अशोक मेहता, का कहना है कि भविष्य में हिंद महासागर में टकराव होना तय है। चीन ने कहना भी शुरू कर दिया है कि हिंद महासागर नाम होने से यह भारत का नहीं हो जाता।
विज्ञापन

रणनीतिक कामों के लिए करें इस्तेमाल

उनका कहना है कि इस क्षेत्र में भारत को अपनी मौजूदगी बनाए रखनी होगा और इसे नई दिल्ली अमेरिका समेत अन्य देशों के सहयोग से कर सकती है।

पूर्व सैन्य कमांडर, अंडमान, लेफ्टिनेंट गवर्नर एके सिंह ,का कहना है कि पहले अपने द्वीपों के बारे में हमारी मानसिकता उपेक्षा वाली रही है। मगर अब वक्त आ गया है कि हम इनका इस्तेमाल बेहद रणनीतिक कामों के लिए करें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें