जामा मस्जिद दिल्ली के इमाम सैय्यद अहमद बुखारी ने आम चुनाव के मद्देनजर एक बार फिर मुस्लिम वोटों के समर्थन के नाम पर उत्तर प्रदेश में सपा को दबाव में लेने की कोशिश की है।
बुखारी ने पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र भेजकर नुकसान की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को सपा से निराशा हो गई है, जिसका प्रभाव आम चुनाव में देखने को मिलेगा।
बुखारी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने मुसलमानों से जो वायदे किये थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया। उन्होंने दो दिन में अपने पत्र का जवाब मांगते हुए चेताया है कि इसी के आधार पर 22 फरवरी को दिल्ली में मुस्लिम प्रतिनिधियों की बैठक में फैसला लिया जाएगा।
'सपा ने पूरे नहीं किए अपने वादे'
जामा मस्जिद की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बैठक में यूपी, बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र, झारखंड, महाराष्ट्र तथा हरियाणा सहित कई अन्य प्रदेशों के मुस्लिम प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
बैठक में उत्तर प्रदेश के मुसलमानों तथा समाजवादी पार्टी के रुख पर मुख्य रूप से चर्चा होगी। इसी संदर्भ में शाही इमाम ने मुलायम सिंह और अखिलेश को अलग से पत्र भेजा है।
पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुसलमानों की समस्याओं पर सपा प्रमुख से कई बार बात हुई। प्रदेश में चुनाव से पहले मांगों को पूरा किये जाने का वायदा भी किया गया लेकिन अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि ऐसा नहीं हुआ। मुसलमानों में सपा सरकार के प्रति यही धारणा बनती जा रही है कि सपा ने उनके हितों में जो वायदे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया जा रहा है।
22 फरवरी से पहले मांगा जवाब
बुखारी ने पत्र में आरोप लगाया कि प्रदेश में सपा की सरकार आने के बाद जिस तरह सांप्रदायिक तथा अराजक तत्वों की मिली-भगत से सैकड़ों दंगे हुए हैं, उसने मुसलमानों को पूरी तरह मायूस कर दिया है। मुसलमानों को सपा से निराशा हो गई है, जिसका प्रभाव लोकसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।
बुखारी ने कहा कि मेरे लिए यह और भी तकलीफदेह है क्योंकि मैने मुसलमानों को भरोसा दिलाया था कि सपा की सरकार बनने पर उन्हें सुरक्षा के साथ तरक्की के अवसर भी मिलेंगे।
उन्होंने मुलायम सिंह को चेतावनी के अंदाज में कहा है कि 22 फरवरी की बैठक से पहले उनको सपा से अपने सारे मुद्दों पर जवाब चाहिए। ताकि इसके आधार पर आम चुनाव में मुसलमानों की सियासत किस करवट बदलेगी इस पर फैसला लिया जा सके।