अदालत ने नौकरानी हत्याकांड मामले में गिरफ्तार बसपा सांसद धनंजय सिंह को जमानत देने से इनकार कर दिया।
धनंजय के खिलाफ दर्ज 31 आपराधिक मामलों, नौकरों की पिटाई, उनको बंधक बनाकर रखने, पत्नी जागृति को मारपीट के लिए उकसाने आदि तथ्यों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि सभी आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।
अदालत ने पुलिस को मामले में गवाहों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने धनंजय व जागृति को तीन दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
पटियाला हाउस कोर्ट में मजिस्ट्रेट गोमती मिनोचा ने 14 पन्नों में सांसद के अपराध में लिप्त होने के संबंध में विस्तृत हवाला दिया है।
अदालत ने आरोपी के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि उसकी पत्नी ने हत्या को अंजाम दिया था और वह उस समय जौनपुर में था।
तलाक का तर्क खारिज
सांसद के उस तर्क को भी खारिज कर दिया गया कि उसने पत्नी से तलाक मांगा है और अलग मकान में रह रहा है। कोर्ट ने कहा कि सांसद होने के नाते धनंजय की आम लोगों की सुरक्षा की संवैधानिक जिम्मेदारी बनती है, लेकिन इस मामले में उलटा हुआ। स्वयं उसके घर में नौकरों के अधिकारों का हनन हुआ है। वह यह तर्क नहीं दे सकता कि उसकी पत्नी ने यह सब किया है।