बसपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहा है कि पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के परिजनों को शामिल कर लोकसभा चुनाव की वैतरणी पार करने का सपा का मंसूबा पूरा होने वाला नहीं है।
कुशवाहा के बसपा में होने के दौरान बसपा पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाने वाली भाजपा के बाद अब सपा की भी असलियत खुलकर सामने आ गई है।अब यह साबित हो गया है कि सपा में गुंडों, अराजकतत्वों और भ्रष्टाचारियों का जमावड़ा मात्र है।
शनिवार को कुशवाहा के परिजनों के सपा में शामिल होने के बाद अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में मौर्या ने कहा कि बसपा ने अन्यायमुक्त, अपराधमुक्त और भ्रष्टाचारमुक्त शासन के संकल्प के साथ सरकार बनाई थी।
इसके आड़े चाहे जो आया, उसके खिलाफ कानूनी और पार्टी स्तर पर कार्यवाही की गई। इसी संकल्प के क्रम में कुशवाहा के खिलाफ कार्रवाई की गई। भ्रष्टाचार के आरोप जैसे ही संज्ञान में आए तत्कालीन मुख्यमंत्री और बसपा अध्यक्ष मायावती ने सीबीआई जांच की संस्तुति की।
वजह, यही कि आरोप सही हों या गलत, जो भी सच्चाई हो जनता के सामने आ जाए। निष्पक्ष जांच के लिए उन्हें पार्टी से भी निकाला। बसपा से निष्कासन के पहले भाजपा व समाजवादी पार्टी बसपा पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे थे।
विधानसभा चुनाव के ठीक पहले भाजपा ने उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया। जब सपा की सरकार बनी तो कुशवाहा के भ्रष्टाचार की बड़ी-बड़ी बातें करते हुए एसआईटी, विजिलेंस, ईडी और लोकायुक्त की जांच शुरू कराई गई।
कुशवाहा के खिलाफ विभिन्न थानों में पुलिस के जरिए भ्रष्टाचार के तमाम केस दर्ज करवाए। सपा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ झूठी वाहवाही लूटने के लिए ऐसा किया।
कुशवाहा की राजनैतिक हैसियत जीरो
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा जनाधार विहीन नेता थे। उनकी राजनैतिक हैसियत जीरो थी। वह एक छोटा सा चुनाव भी कभी नहीं जीत पाए। भाजपा में जाने के बाद यह सच्चाई प्रमाणित हो चुकी है।
मौर्य ने कहा कि बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने उन्हें कई बार एमएलसी और सरकार बनने पर कई महत्वपूर्ण विभागों का मंत्री बनाकर जीरो से हीरो बनाने का काम किया था।
मायावती ने शाक्य, मौर्य, कुशवाहा, सैनी समाज को गौरवान्वित करने के लिए उन्हें आगे बढ़ाया। बीजेपी व सपा में यह वर्ग सत्ता की भागीदारी से हमेशा दूर रखा जाता था लेकिन कुशवाहा ने भ्रष्टाचार में लिप्त होकर न सिर्फ बसपा व मायावती के साथ धोखा किया बल्कि जो समाज पूरे प्रदेश में ईमानदारी का प्रतीक माना जाता था, उसे भी दागदार बनाने का काम किया।