देश की सीमाओं की रक्षक बीएसएफ के जवान विजयादशमी का त्यौहार तभी मनाते हैं जब वह किसी आतंकी को पकड़ने में कामयाब हो जाते हैं। संसद पर हमले के मास्टमाइंड जैश-ए-मोहम्मद के खूंखार आतंकवादी गाजी बाबा को तीन साल तक ढूंढने और उसे मार गिराने की कहानी किसी रामायण से कम नहीं।
अपनी अगुवाई में इस ऑपरेशन को अंजाम देने वाले सीमा सुरक्षा बल के पूर्व डीजी अजय राज शर्मा का मानना है कि गाजी बाबा जैसे रावणों का वध ही सुरक्षा एजेसिंयों की विजयादशमी होती है।
स्वर्ण जयंती मना रहे बीएसएफ के पिटारे में ऑपरेशन गाजी बाबा जैसी कई कहानियां हैं जिन्हें याद कर बीएसएफ के अधिकारी आज भी रोमांचित हो उठते हैं। बीएसएफ के पूर्व डीजी अजय राज शर्मा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि 2001 में संसद पर हमले के बाद की जांच में गाजी बाबा का नाम पहली बार सामने आया। उस दौरान वह दिल्ली पुलिस के कमिश्नर थे।
पूरे खुफिया तंत्र और एजेंसियों की मशक्कत के बावजूद बाबा की जानकारी नहीं मिल पा रही थी। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर गाजी बाबा की ताकत और वहशीपन की कहानी खुफिया एजेंसियों को मिलने लगी थी।
संसद हमले के मुकदमों के दौरान हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार से गाजी को ढूंढने का फरमान भी जारी किया था।