सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत देय पारिश्रमिक विभिन्न राज्यों में दिए जाने वाले न्यूनतम वेतन के बराबर लाया जाए।
जस्टिस एसजे मुखोपाध्याय और जस्टिस एसए बोबड़े की पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि मनरेगा के तहत देय पारिश्रमिक राज्य सरकार की ओर से खेतिहर मजदूरों के लिए निर्धारित न्यूनतम पारिश्रमिक से कम नहीं हो सकता।
सरकार ने पीठ को सूचित किया कि उसने पहले ही राज्य सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम मजदूरी के बराबर पारिश्रमिक देने के बारे में अधिसूचना जारी कर दी है।