एनआरएचएम घोटाले में मंगलवार को पहली गवाही हुई। लखनऊ में लाइजनिंग एंड कंसलटेंसी का काम करने वाले गवाह गिरीश मलिक ने बताया कि बाबू सिंह कुशवाहा और आरपी जायसवाल के हिस्से आए कमीशन के 42 लाख रुपए मुख्यमंत्री मायावती को आवंटित सरकारी आवास में दिए थे।
30 लाख रुपए नरेश ग्रोवर और 12 लाख रुपए ठेकेदार आरके सिंह से ली गई थी। जल निगम की सीएंडडीएस शाखा के जीएम पीके जैन ने यह रकम नवनीत सहगल को दी थी। डिफेंस अब गवाह से जिरह करेगा। इसके लिए कोर्ट ने 19 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।
अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक बीके सिंह ने गवाह गिरीश मलिक को सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल की कोर्ट में पेश किया। डासना जेल में बंद पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, एमएलसी आरपी जायसवाल, जल निगम की सीएंडडीएस शाखा में एकाउंटेंट जेके सिंह, रेजीडेंट इंजीनियर बीएनराम यादव, जीएम पीके जैन, रेजीडेंट इंजीनियर कटार सिंह, प्रोजेक्ट मैनेजर बीएन श्रीवास्तव और कारोबारी आरके सिंह व नरेश ग्रोवर को कोर्ट में लाया गया।
गिरीश मलिक ने बताया कि जून 2009 में सर्जिक्वायन मेडिक्युप के मालिक नरेश ग्रोवर से उसकी फोन पर बात हुई थी। ग्रोवर की इस कंपनी का आफिस दिल्ली में था जबकि कंपनी की फैक्ट्री राई (हरियाणा) और गाजियाबाद में उस समय थी। नरेश ग्रोवर एनआरएचएम योजना के तहत 134 अस्पतालों के ओपीडी के अपग्रेडशन का ठेका हासिल करना चाहते थे।
ठेका कौन देगा, इसका पता करने वह अपने साथी व पार्टनर मानवेंद्र चड्ढा के साथ मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के सरकारी आवास पर गया, वहीं आरपी जायसवाल से मुलाकात हुई थी। कुशवाहा ने बताया था कि उनकी देखरेख में जायसवाल ही एनआरएचएम का काम देखेंगे।
गवाह का कहना था कि कुशवाहा-जायसवाल ने कहा कि प्रोजेक्ट की कुल रकम में से वह 3 प्रतिशत लेंगे। सीएंडडीएस को प्रोजेक्ट देने का प्रस्ताव उसके चेयरमैन नवनीत सहगल की ओर से आया है। यदि कमीशन देने को तैयार हैं तो वह परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव प्रदीप शुक्ला के माध्यम से प्रोजेक्ट सीएंडडीएस को दिलवा देंगे और वहां से आपकी कंपनी को दिलवा देंगे।
गिरीश ने बताया कि वह और उसका पार्टनर नेहरू युवा केंद्र गोमती नगर लखनऊ के मैनेजर डीके सिंह से मिले। डीके सिंह सीएंडडीएस में नवनीत सहगल का सारा काम देखते हैं। डीके सिंह ने बताया कि यदि आप 25 लाख रुपए नवनीत सहगल के लिए देते हैं तो यह काम आपको दिला दिया जाएगा।
साथ ही 134 अस्पतालों में से 20 अस्पतालों का काम उनके जौनपुर के मित्र आरके सिंह को देने की शर्त भी रखी। जुलाई-अगस्त 2009 के दौरान उन्होंने डीके सिंह को उसके आफिस में 25 लाख रुपए दिए। यह 25 लाख नरेश ग्रोवर ने दिए थे। डीके सिंह के कहने पर वह सीएंडडीएस केएमडी भुकेश से मिले। वहां उन्होंने जीएम पीके जैन से मिलवाया।
गवाह के अनुसार पीके जैन ने बताया था कि इस पूरे प्रोजेक्ट से 3 प्रतिशत परिवार कल्याण मंत्री, 2 प्रतिशत नवनीत सहगल और एक-एक प्रतिशत भुकेश, पीके जैन, बीएन श्रीवास्तव, कटार सिंह और यूनिट के एकाउंटेट को देना होगा। गवाह ने बताया कि नवंबर 2009 में पीके जैन ने मेरे पार्टनर और मुझे बुलाकर कहा कि आपने मंत्रीजी के हिस्से के 42 लाख रुपए अभी तक नहीं दिए हैं। तब हम लोगों ने 30 लाख रुपए नरेश ग्रोवर से और 12 लाख रुपए आरके सिंह से लेकर पीके जैन को दिए।
पीके जैन हमे साथ लेकर 13 मॉल एवेन्यु (मायावती को आवंटित सरकारी आवास, हालांकि वह वहां रहती नहीं थी। उस समय वह 5, कालीदास मार्ग पर रहती थीं) गए। जहां हमारे सामने ही पीके जैन ने 42 लाख रुपए नवनीत सहगल को दे दिए। इसके करीब एक सप्ताह बाद हम दोनों पार्टनर बाबू कुशवाहा और जायसवाल से मिले तो उन्होंने बताया कि 42 लाख रुपए मिल गए हैं।