प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी चीन यात्रा के दौरान सीमा विवाद पर बात करेंगे। उन्होंने कहा कि वह चीनी प्रधानमंत्री ली केचियांग के साथ समस्या के समाधान के दृष्टिकोण से बात करेंगे।
प्रधानमंत्री ने संकेत दिए हैं कि यात्रा के दौरान प्रस्तावित सीमा रक्षा सहयोग समझौता (बीडीसीए) उनके एजेंडे में शीर्ष पर रहेगा। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि दोनों देश बीडीसीए पर हस्ताक्षर भी कर सकते हैं।
पांच दिवसीय रूस-चीन दौरे के पहले चरण में प्रधानमंत्री रविवार को मॉस्को पहुंचे, जहां वह रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय और वैश्विक मसलों पर बात करेंगे। प्रधानमंत्री का चीन दौरा 22 अक्तूबर से शुरू हो रहा है।
अपनी यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और चीन के बीच ऐतिहासिक मसले और कई क्षेत्रों को लेकर चिंताएं हैं। दोनों देश इन मुद्दों का पूरी गंभीरता और परिपक्वता के साथ समाधान निकाल रहे हैं ताकि आपसी मित्रता और समग्र सहयोग के माहौल पर इसका असर नहीं पड़े।
अपनी चीन यात्रा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वह चीनी नेताओं के साथ रणनीतिक संवाद के तहत दूरंदेशी और समस्याओं को सुलझाने के दृष्टिकोण के साथ बात करेंगे।
'सहमति पर पहुंच चुके हैं भारत और चीन'
दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और चीन सीमा पर शांति और संयम बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंच चुके हैं और सीमा विवाद के हल के लिए प्रारंभिक प्रगति हुई है। शांतिपूर्ण, दोस्ताना और सहयोगात्मक संबंध दोनों देशों को स्थिरता के साथ प्रगति करने के अवसर उपलब्ध कराएगा।
बीती गर्मियों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों द्वारा लद्दाख की देपसांग घाटी में घुसपैठ की थी। दोनों देशों के अधिकारी एलएसी पर अपनी सेनाओं के बीच टकराव को रोकने के लिए सीमा रक्षा सहयोग समझौते (बीडीसीए) पर काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बुधवार को चीनी समकक्ष ली केचियांग के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। केचियांग प्रधानमंत्री को लंच देंगे। इसके अलावा चीनी राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के डिनर की मेजबानी करेंगे जोकि किसी भी भारतीय नेता के लिए दुर्लभ अवसर है।
क्या है सीमा विवाद
भारत और चीन के बीच 4000 किमी लंबी सीमा को लेकर विवाद है। आए दिन चीन की ओर से होने वाले घुसपैठ को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव के हालात उत्पन्न होते रहते हैं। इस साल चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिक भारत के लद्दाख क्षेत्र में कई बार घुसपैठ कर चुके हैं और कई दिनों तक तंबू गाड़कर भी बैठे रहे।
इसके जवाब में भारतीय सैनिक भी उनके सामने डटे रहे। बाद में भारत सरकार के सख्त ऐतराज जताने के बाद ही चीनी सैनिक वापस अपनी सीमा में लौटे। ऐसे हालातों से बचने के लिए ही सीमा रक्षा सहयोग समझौता का प्रस्ताव सामने आया है।
'सीमा समझौता ‘पंचशील’ जैसी भूल होगी'
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का कहना है कि प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान होने वाला सीमा रक्षा सहयोग समझौता ‘पंचशील’ जैसी भूल साबित होगी। संघ ने ऑर्गनाइजर के हालिया अंक के संपादकीय में कहा कि कोई भी समझौता करने से पहले भारत को चीन के असली इरादों को ध्यान में रखना चाहिए। जब भारत और चीन के बीच में वास्तविक नियंत्रण रेखा का स्पष्ट निर्धारण ही नहीं है तो किस तरह का सीमा समझौता होगा।
इन मसलों पर भी होगी बात
सीमा रक्षा सहयोग समझौते के अलावा प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान व्यापार, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, सीमा पार नदियों, ऊर्जा, कृषि, विज्ञान और तकनीक, एक दूसरे के नागरिकों और युवाओं के बीच आपसी संपर्क के द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा क्षेत्रीय, वैश्विक हितों पर भी चर्चा होगी।