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ISRO चीफ ने खोले मंगलयान के अहम राज

Sun, 16 Nov 2014 11:07 AM IST
विदित मेहरा/संवाददाता बीबीसी
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'रीचिंग फॉर द स्टार्स' वह किताब है जिसमें आपको भारत के मंगल अभियान 'मॉम' से जुड़ी तमाम जानकारियां आपको मिल जाएंगी। साल 2013 में छोड़ा गया मंगलयान इस साल 24 सितम्बर को सफलतापूर्वक मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंच गया।
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इस किताब को लिखा है जाने-माने विज्ञान पत्रकार पल्लव बागला और उनकी पत्नी सुभद्रा मेनन ने। पिछले बुधवार को इस किताब का विमोचन हुआ।

इस अवसर पर 'इसरो' के चीफ के राधाकृष्णन, इसरो के पूर्व चेयरपर्सन यूआर राव समेत 'मंगल मिशन' से जुड़े कई वैज्ञानिक मौजूद थे। जानिए दस दिलचस्प बातें-

1- मॉम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एस अरुणन 'इसरो सैटेलाइट सेंटर' में 15 महीने तक सोए। वह घर जाते थे सिर्फ नहाने और पूजा करने।

2- इसरो के चेयरमैन डॉक्टर के राधाकृष्णन ने कहा कि मंगल का अगला मिशन साल 2018 से 2020 के बीच में होगा लेकिन जरूरी नहीं की वो 'मॉम' जैसा ही हो।
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क्या है इसरो का अगला प्लान?

3- मॉम के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एस अरुणन ने तीन महीने तक दूसरे देशों के अंतरिक्ष मिशनों के विफल होने की तफ्तीश और पढ़ाई की। इससे उन्हें 'मॉम' के लिए काफी सहायता मिली।

4- स्पेस क्राफ्ट ऑथोराइजैशन बोर्ड के चेयरमैन और डायरेक्टर किरन कुमार ने कहा कि मंगल पर जाकर रहने में इंसान को तकरीबन 1000 साल लग जाएंगे।

5- इसरो के पूर्व चेयरपर्सन यूआर राव की दिलचस्पी मंगल ग्रह पर जाने से ज्यादा बुध पर जाने की थी।

6- इसरो के चीफ डॉक्टर राधकृष्णन ने बताया कि दो महिलाओं ने जीएसएलवी को 'वेहिकल असेम्बलिंग बिल्डिंग' से लॉन्च पैड तक पहुंचाया था। इसका वजन लगभग 650 टन था।

7- 'व्हीकल असेम्बलिंग बिल्डिंग' से लॉन्च पैड की दूरी एक किलोमीटर थी।

8- इसरो का अगला 'मिशन चंद्रयान-2' और 'आदित्य' (सूर्य मिशन) होगा।

9- डॉक्टर राधकृष्णन ने बताया कि इसरो स्कूल और कॉलेज के छात्रों को सैटेलाइट बनाने के लिए बढ़ावा दे रहा है।

10- 'मॉम' की ऋतु क्रिदाल ने बताया कि 'मार्स मिशन' में महिलाओं को इसरो ने बराबर का मौका दिया और किसी तरह का भेदभाव नहीं हुआ। यही इसरो की संस्कृति है।
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