बांबे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के उस प्रस्ताव को रद्द कर दिया है, जिसके तहत रिटेल केरोसिन लाइसेंस करने के लिए शादीशुदा बेटी को परिवार का हिस्सा नहीं मानता था। कोर्ट ने इस प्रस्ताव को संविधान का उल्लंघन बताया है और कहा कि बेटियां शादी के बाद भी परिवार का हिस्सा होती हैं।
जस्टिस अभय ओका और एएस चांडूरकर की पीठ ने यह फैसला सुनाया। महाराष्ट्र सरकार ने 20 फरवरी, 2004 को यह सरकारी प्रस्ताव (जीआर) पारित किया था। इसके तहत रिटेल केरोसिन लाइसेंस हासिल करने के लिए शादीशुदा बेटी को परिवार का हिस्सा नहीं माना गया था।
रिटेल केरोसिन लाइसेंस धारक शादीशुदा बेटी रंजना अनेराव ने इस प्रस्ताव को अदालत में चुनौती दी थी। उनका कहना है कि वह भी परिवार का हिस्सा है और इसलिए उसकी मां के निधन के बाद उनकी जगह उसे लाइसेंस मिलना चाहिए।