विवाह के बाद हनीमून ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व थाईलैंड में। शादी की पहली वर्षगांठ दक्षिण अफ्रीका में। बीएमडब्लू कार में सवारी, फिर भी गरीब। हाईकोर्ट ने गुजारे भत्ते के एक मामले में पति के तर्क को खारिज करते हुए उसे बच्चे के पोषण व पत्नी को प्रति माह डेढ़ लाख रुपये देने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति पी.के. भसीन ने अपने फैसले में पत्नी रिधिमा की अपील मंजूर करते हुए पति देवेन जुनेजा के उस तर्क को खारिज कर दिया कि वह अमीर माता-पिता का बेटा है, लेकिन गरीब है। अदालत ने उसके उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि उसकी वार्षिक आय मात्र दो लाख रुपये है और वह इतना शानदार जीवन मात्र अपने दोस्तों के सहारे जी रहा है।
अदालत ने कहा कि साक्ष्यों से स्पष्ट है कि याची का पति भव्य व शानदार जीवन जी रहा है और उसके पास बीएमडब्ल्यू कार भी है। इस तथ्य से उसने इंकार भी नहीं किया। उसका निवास अशोक विहार जैसे पॉश इलाके में है। अदालत ने कहा उसके इस तर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता कि उसे भव्य जीवन जीने के लिए अमीर माता-पिता व दोस्त पैसे दे रहे हैं।
अदालत ने कहा कि याची द्वारा पेश फोटो से स्पष्ट है कि वह भव्य जीवन जीने का आदी है और उसके पास काफी पैसा व संपत्ति है और कई कंपनियों में उसका शेयर है।
अदालत ने कहा कि उसने माना है कि प्रथम वर्षगांठ दक्षिण अफ्रीका में मनाने का खर्च उसने स्वयं वहन किया था। इसके अलावा उसने दिल्ली पुलिस की महिला शाखा के समक्ष माना था कि वह पत्नी को खर्च के लिए डेढ़ लाख रुपये दे रहा है।
अदालत ने कहा अब उसके इस तर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता कि यह तथ्य टाइपिंग की गलती से हो गया और वह मात्र 15 हजार रुपये ही दे सकता है, क्योंकि वह गरीब है। अदालत ने आदेश दिया कि वह दो सप्ताह में पत्नी को याचिका दायर करने से अब तक की बकाया राशि सहित पूरी राशि का भुगतान करे।
रिधिमा व देवेन का विवाह 31 जनवरी 2004 को हुआ था और दो नवंबर 2005 को उनके घर पुत्र ने जन्म लिया। इसके बाद उनके बीच विवाद शुरू हो गया व वर्ष 2007 में रिधिमा ने घरेलू हिंसा कानून के तहत शिकायत दर्ज करवाकर गुजारे भत्ते की मांग की थी।