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आप भी कराते हैं तत्काल टिकट तो रहें सावधान, पढ़ें ये खबर

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शहर में आरक्षित रेल टिकटों की कालाबाजारी का धंधा हाईटेक हो गया है। हाईस्पीड सर्वर से लैस साइबर कैफे से रेल टिकटों की बिक्री हो रही है। इस धंधे में आईआरसीटीसी का लाइसेंस रखने वाले एजेंट से लेकर बिना लाइसेंस वाले एजेंट दोनों शामिल हैं।
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टिकट के लिए फर्जी आईडी का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। रेलवे अधिकारियों की तमाम बंदिशों और कार्रवाई के बाद भी इस पर रोकथाम नहीं लग पा रही है।

हाल में ही लहुराबीर और लंका इलाके में रेलवे और आईआरसीटीसी की विशेष टीम ने दो कैफे पर छापेमारी कर बड़ी संख्या में फर्जी आईडी से बने आरक्षित टिकट बरामद किए थे। इन टिकटों को तत्काल कोटे में बुक किया गया था।

पूछताछ में पकड़े गए एजेंटों ने बताया था कि वे इसे मुंहमांगी कीमत पर बेचने वाले थे। आमतौर पर आईआरसीटीसी के एजेंटों का तत्काल कोटा आमजन से आधे घंटे बाद शुरू होता है।
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रेलवे को चूना लगा रहे हैं

इस आधे घंटे की मार्जिन में दलाल फर्जी आईडी से आम जन की तरह तत्काल टिकट बुक करके रेलवे को चूना लगा रहे हैं और खुद मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
इसके अलावा, तमाम ऐसे लोग भी इस धंधे में हैं जिनके पास लाइसेंस नहीं है। सिर्फ फर्जी आईडी पर ही उनका धंधा चलता है। इसके लिए एजेंटों ने बाकायदा हाईस्पीड इंटरनेट सर्वर लगा रखा है। एक साथ कई कंप्यूटर पर टिकटों की बुकिंग का काम होता है।

धंधे में 4 जी एंड्रायड मोबाइल का भी इस्तेमाल खूब हो रहा है। एजेंटों द्वारा तत्काल टिकट का कोटा खाली कर देने से जरूरतमंदों को रेलवे काउंटर से बैरंग लौटना पड़ रहा है।

जिन आईडी से ज्यादा टिकट बुक हो रहे हैं, उन्हें चिह्नित किया जा रहा है। ऐसे लोगों पर हमारी नजर है। ऐसे मामलों में लगातार कार्रवाई हो रही है। कानपुर, लखनऊ में ऐसे एजेंट के सिंडीकेट का भंडाफोड़ किया गया है।
-अश्विनी कुमार श्रीवास्तव, चीफ रिजनल मैनेजर आईआरसीटीसी
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