पुलिस पिटाई में कई भाजपा कार्यकर्ता जख्मी हुए हैं। जेल अस्पताल में इनका इलाज चल रहा है। इनमें से एक की आंख छर्रा लगने से जख्मी है। एक आंख से नहीं दिखने की शिकायत भाजपा कार्यकर्ता ने जेल प्रशासन से की है। हालांकि बंदी भाजपा कार्यकर्ता की आंख को स्थायी नुकसान होने से जेल प्रशासन इंकार कर रहा है।
विज्ञापन
कांठ में 27 जून को हिंदू संगठनों और भाजपा द्वारा सड़क जाम के दौरान पुलिस और पब्लिक के बीच फायरिंग और पथराव हुआ था। जिसके बाद पुलिस ने 19 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। थाने में इनकी पिटाई भी की गई थी। इसी में रायपुर खुर्द निवासी खड़ग सिंह की आंख में छर्रा भी लगा। जिसके बाद से खड़ग सिंह को इस आंख से दिखना बंद है। हालांकि जेल में दाखिल होने के बाद से ही जेल प्रशासन ने बंदी की आंख का इलाज शुरू करा दिया है।
जेल प्रशासन का कहना है कि नेत्र चिकित्सक की देखरेख में बंदी जेल अस्पताल में भर्ती है। जेल में बंद रवि कुमार पुत्र महेंद्र के हाथ में चोट है। उसका आरोप है कि उसे पुलिस ने रायफल की संगीन से जख्मी किया। जबकि वो छात्र है और पढ़ाई के लिए कांठ में किराए पर कमरा लेकर रहता है। लेकिन पुलिस ने उसे बलवाई बताकर जेल भेज दिया। पुलिस पिटाई में डा. चंद्रहास के कान का पर्दा फट गया है।
विज्ञापन
जुल्म की दास्तां सुनाते वक्त फफक पड़े भाजपाई
कांठ थाने में हुए जुल्म की दास्तां सुनाते-सुनाते भाजपाई फफक पड़े। जेल में पूरे एक घंटे तक भाजपा कार्यकर्ता विधायक दल को घेरे रहे और अपने जिस्म पर चस्पा पुलिस टार्चर के सुबूत दिखाते हुए आपबीती सुनाई। कहा, सात घंटे पुलिस ने उन पर जुल्म ढहाया और वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी जूते चप्पलों से पीटकर बेइज्जत किया।
शाहजहांपुर विधायक सुरेश खन्ना के नेतृत्व में दोपहर करीब दो बजे जिला कारागार पहुंचा भाजपा विधायकों का दल। क्षेत्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, महानगर अध्यक्ष रितेश गुप्ता, अभिनय चौधरी और भाजयुमो जिलाध्यक्ष विशाल त्यागी समेत कई भाजपा नेता उनके साथ थे। जेल पर पूर्व मंत्री गुलाबो देवी के नेतृत्व में कुछेक भाजपाई और जेल में बंद कार्यकर्ताओं के परिजन पहले से खड़े थे। विधायक दल जेल में दाखिल हुआ तो उन्हें देखते ही यहां बंद कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया।
भाजपा के संभल जिलाध्यक्ष महेश चंद्र गुप्ता, अमरोहा जिलाध्यक्ष गिरीश त्यागी, विकास जैन समेत तमाम पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं विधायक दल को बताया कि चार जुलाई की रात को कांठ थाने में पुलिस ने बर्बरता से कार्यकर्ताओं को पीटा। अंग्रेजी दौर से भी क्रूर हुई पुलिस ने सात घंटे तक लाठी डंडा, जूते चप्पलों और लात घूसों से हर छोटे बड़े भाजपाई की पिटाई की। सुबह से बंद भाजपा कार्यकर्ताओं को न तो खाना दिया न पानी। एसएसपी धर्मवीर सिंह, एसपी देहात अनिल कुमार सिंह और सीओ राहुल ने खुद कार्यकर्ताओं को पीटा और पुलिस के जवानों से बेरहम पिटाई कराई।
दोफाड़ हुई भाजपा ने पिटवा दिए कार्यकर्ता
सूबे की अस्सी में से 73 लोकसभा सीटें जिस पार्टी के पास हों, केंद्र में जिसकी पूर्ण बहुमत की सरकार पूरी हनक से चल रही हो। मंडल की सभी छह लोकसभा सीटों पर जिस पार्टी का कब्जा हो। उसके दो मौजूदा जिलाध्यक्षों को थाने में अपराधियों से भी बदतर हालत में टार्चर किया गया। लेकिन अंदरूनी कलह से जूझ रही पार्टी अपने नेताओं को पीटने वालों के खिलाफ एक नारा तक बुलंद नहीं कर सकी। संगठन और सांसदों के जुदा रास्तों के बीच कार्यकर्ता पिस रहे हैं।
अकबरपुर चैदरी प्रकरण में भाजपा की गुटबाजी पहले दिन से सड़क पर नजर आ रही है। 26 जून को धर्मस्थल से लाउडस्पीकर उतारे जाने और 27 जून को कांठ में लाठीचार्ज के बाद भाजपा ने इसे मुद्दा बनाने की ठानी थी। 28 जून को क्षेत्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, महानगर अध्यक्ष रितेश गुप्ता ने प्रेस कांफ्रेंस कर महापंचायत का ऐलान किया। प्रदेश अध्यक्ष से बात कर 29 जून को तीन विधायकों सुरेश राणा, रविंद्र भड़ाना और लोकेंद्र चौहान की जांच समिति मुरादाबाद बुला ली। शाम को सर्किट हाउस में चला एपिसोड निपटा तो दिल्ली से सांसद सर्वेश, मंत्री बालियान को लेकर चल पड़े। आंदोलन को लीड कर रहे क्षेत्रीय अध्यक्ष को सांसद के मूव करने की भनक तक नहीं थी। क्रेडिट सांसद की तरफ खिसका तो भूपेंद्र सिंह ने कदम पीछे खींच लिए। अलबत्ता दो जुलाई तक महापंचायत की तैयारियां होती रहीं।
दो जुलाई की रात को भाजपा क्षेत्र अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह और महापंचायत संयोजक पूर्व विधायक राजेश चुन्नू को कमिश्नर ने यकीन दिलाया कि तीन जुलाई की सुबह ग्यारह बजे लाउडस्पीकर लग जाएगा दोनों नेताओं ने सांसद सर्वेश की कमिश्नर से फोन पर बात कराई। लेकिन मुद्दा सुलझता देख क्रेडिट लेने की होड़ में सांसद तीन जुलाई को सुबह आठ बजे अकबरपुर चैदरी पहुंच गए। पार्टी को छोड़कर सांसद सीधे पुलिस प्रशासनिक अफसरों के संपर्क में थे। पार्टी को उनके गांव पहुंचने की भनक तक नहीं थी। चार जुलाई की घटना के बाद भी संगठन और सांसद की राहें जुदा हैं। शनिवार को पूरी तरह दूरी बनाए रखने के बाद रविवार को सांसद जेल गए लेकिन संगठन के कार्यक्रम से अलग। प्रदेश से आई समिति से न वो मिले न उनके साथ जेल गए।
कांठ बवाल की जांच को पहुंचे भाजपा के पांच सदस्यीय विधायक दल ने जेल में बंद भाजपाइयों से मुलाकात के बाद कांठ में हुई हिंसा के लिए प्रदेश की अखिलेश सरकार और मुरादाबाद प्रशासन को कसूरवार ठहराया है। विधायकों ने मुरादाबाद एसएसपी को सपा का एजेंट बताते हुए तुरंत सस्पेंड करने की मांग की है। विधायक दल ने कहा कि कांठ थाने में एसएसपी की मौजूदगी में भाजपा कार्यकर्ताओं की बर्बर पिटाई की गई है। भाजपा सोमवार को इस मुद्दे पर विधानसभा में सरकार को घेरेगी। संसद में भी मामला उठाएंगे और सड़कों पर भी लड़ाई लड़ी जाएगी। जिला प्रशासन ने विधायक दल को कांठ जाने की अनुमति नहीं दी।
शाहजहांपुर विधायक सुरेश खन्ना के नेतृत्व में थाना भवन शामली विधायक सुरेश राणा, बरेली विधायक डा. अरुण कुमार सक्सेना, आंवला विधायक धर्मपाल सिंह और नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान की सदस्यता वाला विधायक दल रविवार को दोपहर साढ़े बारह बजे ट्रेन से मुरादाबाद पहुंचा। भाजपा विधायकों ने पहले स्थानीय दाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग की और फिर जिला कारागार जाकर जेल में बंद भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। समिति ने करीब घंटाभर तक जेल में कार्यकर्ताओं से घटना की जानकारी ली और बाहर आते ही प्रदेश सरकार और मुरादाबाद जिला प्रशासन पर बरस पड़े।
समिति के अध्यक्ष सुरेश खन्ना ने कहा कि तुष्टिकरण में अंधी प्रदेश सरकार के इशारे पर मुरादाबाद पुलिस प्रशासन ने एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए अकबरपुर चैदरी में पांच साल से धर्मस्थल पर लगे लाउडस्पीकर को ताले तोड़कर उतारा। दलित महिलाओं की चोटियां पकड़कर उन्हें घसीटा गया, कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुआ और उन पर गोलियां चलाई गईं। थाने में भाजपा कार्यकर्ताओं की जूतों, डंडों से बर्बर पिटाई की गई, सिख भाजपाइयों की पगड़ियां उछालीं गईं और महिलाओं को बेइज्जत किया गया। समिति ने कहा कि इस मुद्दे पर वह प्रदेश अध्यक्ष को रिपोर्ट देगी। समिति ने कहा कि एक वर्ग पर हो रहे जुल्म और भाजपा कार्यकर्ताओं की बर्बर पिटाई पर भाजपा सोमवार को विधानसभा में सरकार को घेरेगी, मामला लोकसभा में भी उठाया जाएगा।