लोहा लोहे को काटता है। इसी कहावत के तर्ज पर भाजपा कांटे से कांटा निकालने की रणनीति के तहत खुद पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों को गैरराजग शासित राज्यों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों से धोने की तैयारी में है।
संसद के मानसून सत्र में पार्टी ने उन करीब 1 दर्जन भ्रष्टाचार केमामलों की सूची तैयार की है, जिसका लेना देना गैरभाजपा शासित राज्यों और नेताओं से है।
पार्टी की योजना सत्र के दौरान इन मुद्दों पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत चर्चा के लिए नोटिस देने की है। इसके लिए जिन मामलों का चयन किया गया है, उनमें गोवा और असम में अमेरिकी फर्म की ओर से मंत्रियों को रिश्वत दिए जाने का मामला, पश्चिम बंगाल में शारदा चिट फंड घोटाला और मानव तस्करी मामला, केरल का बार और सोलर घोटाला, राजस्थान में कांग्रेस अध्यक्ष राबर्ट वाड्रा के जमीन सौदे में कथित गड़बड़ी का मामला, कर्नाटक में किसानों के आत्महत्या का मामला, हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जारी सीबीआई जांच का मामला शामिल है।
विपक्ष नाक में दम करने की तैयारी में
दरअसल भाजपा नहीं चाहती कि विपक्ष ललित गेट मामले में घिरी राजस्थान की
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, मध्य प्रदेश का व्यापम, छत्तीसगढ़ में पीडीएस
में भ्रष्टाचार और महाराष्ट्र सरकार केदो मंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के
मामले को सदन में उठाए।
विपक्ष इन्हीं मुद्दों के सहारे सरकार के नाक में
दम करने की तैयारी में है। ऐसे में सरकार और भाजपा के रणनीतिकारों को लगता
है कि अगर उसने भी विपक्ष से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले को तूल दिया तो उसे
रक्षात्मक मुद्दा अपनाने पर मजबूर किया जा सकता है।
पार्टी
सूत्रों ने बताया कि बीते रविवार को अध्यक्ष अमित शाह के निवास पर हुई
मैराथन बैठक में गैरराजग शासित राज्यों और विपक्ष के नेताओं से जुड़े
भ्रष्टाचार के मामले की फेहरिस्त तैयार की गई।
परंपरा तोड़ रही है कांग्रेस-रविशंकर
इसी दौरान इन सभी मामलों से
जुड़े सभी तथ्य और बिंदु तैयार किए गए। इसके बाद विपक्ष को संसद में घेरने
केलिए इन सभी मामलों पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का नोटिस दे कर चर्चा की मांग
की गई।
इस दौरान इस बात का ध्यान रखा गया कि निशाना बनाने के लिए सिर्फ
कांग्रेस को नहीं बल्कि उन विपक्षी दलों से जुड़े मामलों को भी खंगाला जाए,
जो सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।
दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद
ने कहा भी कि संसद साढ़े छह दशक के इतिहास में राज्यों के विषय पर चर्चा न
कराने की परंपरा रही है। संविधान भी इसकी इजाजत नहीं देता।
प्रवक्ताओं को भी किया लैस
फिर भी अगर
विपक्ष और खासतौर पर कांग्रेस राज्यों के विषय उठाना चाहती है तो उसे
राबर्ट वाड्रा और वीरभद्र सिंह पर भी चर्चा के लिए तैयार रहना होगा।
विपक्ष
शासित राज्यों के भ्रष्टाचार के मामलों के बारे में मंगलवार को वित्त
मंत्री अरुण जेटली ने पार्टी और सरकार के प्रवक्ताओं को भी सूचनाओं से लैस
किया।
प्रवक्ताओं को इन मामलों को जोरशोर से उठाने का निर्देश दिया गया है।
इसकी शुरुआत मंगलवार को दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने की है।