राष्ट्रीय राजनीति के लिए मंच उपलब्ध कराने के बाद भाजपा अब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर पिछड़ा वर्ग का कार्ड खेलेगी।
मोदी पिछड़े वर्ग से आते हैं। भाजपा ने नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव और मुलायम सिंह यादव के सियासी हमलों का करारा जवाब देने के लिए मोदी रूपी हथियार को चुना है।
टीम राजनाथ को लेकर असंतोष के सुर
भाजपा की यह कवायद वास्तव में मोदी के सियासी रास्ते के कांटे दूर करने की कोशिश का हिस्सा है। मोदी पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था संसदीय बोर्ड में शामिल तो हो चुके हैं और देर-सबेर उन्हें पार्टी की केंद्रीय चुनाव प्रचार समिति की कमान भी सौंपा जाना तय है, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में उनके धुर विरोधी भी बड़ी संख्या में हैं। मोदी की कट्टर हिंदुत्व की छवि ही अब उनकी राह में सबसे बड़ी बाधा है।
गुजरात में विकास मॉडल की देश-दुनिया में सराहना होने से मोदी अब सुशासन व विकास के लिए पहले से ही पहचाने जाने लगे हैं। भाजपा का आकलन है कि मोदी की सुशासक की छवि के साथ ओबीसी कार्ड जुड़ने से वे पूरे देश में स्वीकार्य हो जाएंगे।
पार्टी का यह भी मानना है कि मोदी का विरोध करने वाले नेताओं में अधिकतर पिछड़ी जातियों से ही हैं। खासतौर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अप्रत्यक्ष हमलों से भाजपा परेशान है। पार्टी का मानना है कि पिछड़ा कार्ड से नीतीश को भी मोदी को लेकर जवाब मिल जाएगा। कांग्रेस को भी मोदी के इस रूप पर हमला करना भारी पड़ेगा।
पार्टी यह भी प्रचारित करेगी कि वह सिर्फ सवर्णों को ही नहीं, बल्कि ओबीसी को भी तवज्जो देती है क्योंकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान भी ओबीसी हैं। इनसे पहले उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह हों या मध्य प्रदेश में उमा भारती, ये नेता भी पिछड़े वर्ग से रहे हैं। इसलिए अब भाजपा मोदी का पिछड़ा कार्ड को भुनाने जा रही है।