वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की तर्ज पर भाजपा अब विधानसभाओं के महासमर के लिए अपने महारथियों को भी चुनावी रथों पर रवाना करने जा रही है।
खासतौर पर राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सियासी जंग के लिए भाजपा के चुनावी रथ सजने लगे हैं।
कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के अलग राह पकड़ने से कमजोर हुई भाजपा अब आगामी नवंबर में होने जा रहे विस चुनावों में चारों राज्यों को फतह करने के लिए अपने महारथियों को अभी से रथों पर सवार कर जनता के बीच में भेज रही है।
कर्नाटक के बाद भाजपा को दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनावी जंग में उतरना है।
कर्नाटक में भाजपा खुद भी ज्यादा आशावान नहीं है। मगर बाकी चार राज्यों के चुनावों से पार्टी को बहुत उम्मीदें हैं। हालांकि इनके चुनाव में अभी आठ महीने बाकी हैं।
भाजपा का चुनावी रथ सबसे पहले राजस्थान में रवाना होने जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे आगामी चार अप्रैल को ‘सुराज संकल्प यात्रा’ के तहत अपने रथ पर सवार होकर आम लोगों के पास जाएंगी।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह इस रथ को हरी झंडी दिखाएंगे। पार्टी का आकलन है कि राजस्थान में वह कांग्रेस से सत्ता छीन सकती हैं।
मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ को लेकर भाजपा पूरी तरह से आश्वस्त है कि पार्टी वहां लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटेगी। हालांकि दिल्ली को लेकर पार्टी अभी आशंकित है।
बहरहाल, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी वसुंधरा की तरह जल्दी ही रथयात्रा पर निकलेंगे।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की रथयात्रा का नाम ‘विजय यात्रा ’ रखा गया है, जबकि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की रथयात्रा के नाम के लिए अभी विचार-मंथन जारी है।