लोकसभा की चुनावी जंग में उत्तर प्रदेश व बिहार से कम से कम 80 सीटें पाने की उम्मीद कर रही भाजपा को ‘दमदार उड़ते पंछियों’ से कोई परहेज नहीं है।
दमदार प्रत्याशी तलाश रही भाजपा को अकेले उत्तर प्रदेश में ही लगभग 30 सीटों पर ‘बाहरी’ लोगों को टिकट देना पड़ सकता है।
इन सीटों पर पार्टी को जिताऊ प्रत्याशी चाहिए। इसलिए विचाराधारा और पार्टी की प्रतिबद्धता किनारे कर दी गई है।
भाजपा भी मानती है कि गंगा घाटी के इन दो प्रदेशों यूपी व बिहार को फतह करने पर ही नरेंद्र मोदी की दिल्ली तख्त की राह आसान हो पाएगी। इसलिए पार्टी हर हालत में जिताऊ उम्मीदवार तलाश रही है।
इसी रणनीति के तहत पार्टी इन दोनों प्रदेशों में अब तक कई दलबदलुओं से लेकर पूर्व नौकरशाहों को पहले ही शामिल कर चुकी है, लेकिन मोदी की लहर के बावजूद पार्टी नेतृत्व को अभी और दमदार नेताओं की दरकार है।
कुशवाह और पासवान को जिम्मेदारी
सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से इलाहाबाद, फूलपुर, अमरोहा, भदोही, नगीना, बदायूं, खीरी, अकबरपुर, कौशांबी, कैसरगंज, जौनपुर, बिजनौर, बांदा, उन्नाव, नोएडा, हमीरपुर समेत कई सीटों के लिए भाजपा जिताऊ उम्मीदवार तलाश रही है।
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह यदि लखनऊ से चुनाव लड़ते हैं तो गाजियाबाद से भी दमदार प्रत्याशी चाहिए। डुमरियागंज से कांग्रेस के बागी जगदंबिका पाल को चुनाव लड़ाने की तैयारी है।
इसी तरह बिहार की 40 सीटों में से 10 को भाजपा गठबंधन के तहत रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा को दे चुकी है।
सबका पार्टी में स्वागत
तय है कि अब भाजपा पांच सीटों पर प्रवासी पंछियों को उतारेगी। लालू प्रसाद यादव के करीबी रहे रामकृपाल यादव से पहले भी कई ‘उड़ते पंछी’ भाजपा का दामन थाम चुके हैं।
हालांकि पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन की दलील है कि नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए जो भी नेता भाजपा के साथ आएगा, उसका स्वागत है। उन्होंने कहा कि इससे यह कहना उचित नहीं है कि पार्टी के कार्यकर्ता हमेशा ही दरी बिछाते रह जाएंगे और दलबदलू संसद पहुंच जाएंगे