बिहार की हार पर पार्टी की लानत-मलामत करने वाले भाजपा के बुजुर्ग नेता कार्रवाई की धमकी से विचलित नहीं हुए हैं। पीएम नरेंद्र मोदी और अध्यक्ष अमित शाह पर सीधा हमला बोलने वाले ये नेता फिलहाल मामले को गरमाए रखना चाहते हैं। नई रणनीति के मुताबिक पार्टी के अन्य बुजुर्ग नेता बारी-बारी से अलग-अलग समय में हमला बोलेंगे। इसके बाद भी पार्टी नेतृत्व की ओर से सकारात्मक संकेत न मिलने पर नए सिरे से बड़ा हमला बोलेंगे।
मोदी-शाह समर्थक नेताओं का मानना है कि पार्टी की बुजुर्ग सेना की पहली कोशिश शाह को फिर से अध्यक्ष न बनने देने की है। इनकी रणनीति को भांपते हुए समर्थक खेमा भी चौकन्ना है। बुजुर्ग सेना की ओर से साझा बयान के बाद लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष करिया मुंडा का नेतृत्व पर तो मोदी-शाह समर्थक सांसद भरत सिंह का बुजुर्ग सेना पर हमला बताता है कि यह खींचतान लंबे समय तक जारी रहने वाली है।
खास बात यह है कि विवाद के चरम पर पहुंचने के बावजूद संघ ने सार्वजनिक तौर पर खुद को मामले को सुलझाने से दूर रखा है। यह भी कहा जा रहा है कि नतीजे आने केतुरंत बाद भाजपा सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के संघ प्रमुख मोहन भागवत पर सीधे हमले से संघ नाराज है।