टूजी मामले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठकों का बहिष्कार कर रही भाजपा ने अपने इस फैसले पर यू टर्न ले लिया है। पार्टी ने समिति की आगामी आठ नवंबर की प्रस्तावित बैठक में शामिल होने का फैसला किया है।
हालांकि, इस बैठक में भी भाजपा प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को गवाही के लिए बुलाने की मांग दोहराएगी। लेफ्ट भी वित्त मंत्री को गवाही के लिए बुलाने की मांग पर अडिग है। इससे जेपीसी की इस बैठक के हंगामेदार होने के पूरे आसार हैं।
समिति के सदस्य व भाजपा महासचिव धर्मेंद्र प्रधान ने अमर उजाला से कहा कि पार्टी अगली बैठक में शामिल होगी। चूंकि समिति की पिछली बैठक में पूर्व कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर कह चुके हैं कि वे टूजी मामले में वे प्रधानमंत्री को पूरी जानकारी दे चुके थे, ऐसे में अब प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को गवाही के लिए बुलाने की मांग का औचित्य और भी बढ़ गया है।
भाजपा के सदस्य इसी मांग को दोहराने के लिए आगामी बैठक में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि भाजपा समिति की रिपोर्ट में अपना पक्ष शामिल कराने के लिए अब अगली बैठकों में शामिल होती रहेगी। हालांकि प्रधान ने कहा कि बैठक के बाद ही अगले कदम को लेकर फैसला किया जाएगा।
खास बात यह है कि जेपीसी में फिलहाल कांग्रेस के दो सदस्य कम हो गए हैं। शशि थरूर और मनीष तिवारी अब मंत्री बन चुके हैं। जबकि अब तक की बैठकों में भाजपा नेताओं से भिड़ने में यही दो नेता सबसे आगे रहते थे। समिति से इनकी विदाई हो जाने से भाजपा को कुछ राहत भी है। भाजपा इससे पहले लगातार तीन बैठकों का बहिष्कार कर चुकी है।
समिति के चेयरमैन पीसी चाको और भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा के बीच इस मसले पर पत्राचार भी होता रहा है। चाको साफ कर चुके हैं कि मौजूदा नियम व परंपरा पीएम और वित्त मंत्री को बुलाने की अनुमति नहीं देते हैं।