मुस्लिम हितों के मुद्दे पर दूसरे दलों को फरेबी बता गए मुख्तार अब्बास नकवी को अपनी सभा का सच मालूम होता तो क्या कहते यह तो नहीं पता, लेकिन वह अपनी ही पार्टीवालों के गहरे फरेब का शिकार जरूर हुए।
दरअसल वह सभागार में जिन लोगों को मुसलमान समझ कर खिताब कर रहे थे उनमें अधिसंख्य गैर मुस्लिम थे। इस समुदाय द्वारा पहनी जाने वाली टोपी से यह फरेब बुना गया।
कम कार्यकर्ता जुटे तो हुआ खेल!
अपने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के सामने भाजपा के प्रति मुस्लिमों में प्रेम को जिस नकाब में पेश किया गया, उसे इस टोपी ने बेनकाब कर दिया।हुआ यूं कि नकवी निर्धारित समय पर आ गए। वह खेरिया मोड़ पर थे जब यह खबर सभास्थल पर पहुंची।
वहां तब तक सिर्फ 20-30 लोग ही जुटे थे। आयोजकों के होश उड़ गए। आनन-फानन आसपास से कार्यकर्ता बुलाए गए। इनमें अधिकांश गैर मुस्लिम थे। अल्पसंख्यकों की संख्या दिखाने को औरों के साथ इन्हें भी वही टोपी पहना दी गई।
नकवी को नहीं लगी भनक
मदरसे से छात्र और मुस्लिम महिलाओं को गाड़ी में लाया गया। इसकी भनक नकवी को न लगे इसलिए उन्हें नाश्ता कराने के बहाने ब्रज क्षेत्र कार्यालय ले जाकर अटकाया गया। ‘सीन क्रिएट’ होते ही उन्हें लाया गया।
अनुराग बंसल भी उन युवकों में थे जिनके सिर पर टोपी थी। लोहामंडी के राहुल और विशाल, जगदीशपुरा में परचून की दुकान चलाने वाले चमन से भी कहा गया था कि बस 15 मिनट के लिए चले चलो।
सफेद रंग की 500 टोपियां खरीदीं
उन्होंने बताया, ‘आए तो हमें टोपी पहनाकर बिठा दिया।’ सूत्रों ने बताया कि सफेद रंग की एक सी करीब पांच सौ टोपियां सोमवार सुबह ही खरीदी गई थीं।
वहीं इस पूरे मसले पर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री अशफाक सैफी ने कहा टोपी को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। भाजपा का बढ़ता जनाधार देख सपा-बसपा बदनाम कर रही हैं।
किसी ने शौकिया लगा लिया हो तो और बात है। किसी को टोपी पहनने के लिए बाध्य नहीं किया गया था।