आम आदमी पार्टी (आप) के चुनावी मैदान में आने के बाद लोकसभा की जंग के लिए भाजपा को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा है।
चुनावी जंग के दौरान भाजपा के निशाने पर कांग्रेस ही रहेगी लेकिन पार्टी आप की गतिविधियों पर भी खास नजर रखेगी। खासतौर पर उम्मीदवारों का चयन अब ‘आप’ को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा इसी माह 20 जनवरी के बाद उम्मीदवारों के चयन में जुटेगी। इस बार साफ छवि वाले युवा और नए चेहरों को पार्टी ज्यादा तवज्जो देगी।
आप के उदय के बाद पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश इकाईयों से कहा है कि संभावित प्रत्याशियों का पैनल तैयार करने में युवा और साफ छवि वाले को प्राथमिकता दें। संघ भी भाजपा को यही सलाह दे चुका है।
हालांकि पार्टी लालकृष्ण आडवाणी व डा. मुरली मनोहर जोशी समेत अन्य प्रभावशाली बुजुर्ग नेताओं को भी चुनाव लड़वाएगी।
पार्टी ‘आप’ के कारण देशभर में शहरी क्षेत्रों की 240 सीटों को लेकर आशंकित है लेकिन यह भय प्रकट करना नहीं चाहती है। इसलिए तय किया गया है कि रैलियों, कार्यक्रमों से लेकर मीडिया में कांग्रेस पर ही निशाना साधा जाए।
जबकि ‘आप’ को लेकर भाजपा फिलहाल चुप ही रहेगी। पार्टी के एक नेता का कहना था कि अभी ‘आप’ के खिलाफ बोलने से नुकसान ही होगा।
इसलिए आप पर हमला करने की बजाए उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। दिल्ली में आगामी 17 से 19 जनवरी तक लोकसभा चुनाव की तैयारी को लेकर विचार मंथन करने जा रही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी व राष्ट्रीय परिषद की बैठक में ‘आप’ की रणनीति की काट का रास्ता भी तलाशेगी।