दिल्ली में सरकार बनाने के मुद्दे पर दो कदम आगे और चार कदम पीछे का रुख अपनाने वाली भाजपा दरअसल विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के पक्ष में सकारात्मक माहौल बनते देखना चाहती थी। उसे इंतजार था हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव परिणाम का।
अब दोनों राज्यों में पार्टी की सरकार बन चुकी है। ऐसे में पार्टी का हौसला बढ़ना लाजमी है। उसे झारखंड के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव से भी सकारात्मक नतीजे की उम्मीद बंध गई है। ऐसे में भाजपा दिल्ली में सरकार न बनाकर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है।
पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि झारखंड और जम्मू-कश्मीर के सकारात्मक परिणाम से उपजने वाला राजनीतिक माहौल दिल्ली में भी पार्टी का बेड़ा पार लगा देगा। अपनी इसी रणनीति के तहत पार्टी ने इन दो राज्यों में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पहले अपने पत्ते नहीं खोले थे।
वैसे पार्टी की राज्य इकाई सरकार बनाने के पक्ष में थी, मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जोड़तोड़ के सहारे सरकार बनाने के खिलाफ थे। अंतत: हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजे आने के बाद मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य इकाई को चुनाव के लिए कमर कसने का अंतिम फरमान सुना दिया।